शनिवार, 20 अगस्त 2011

जन्माष्टमी (2011) के शुभ अवसर















 मैंने जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर
श्री-मद्-भगवद्-गीता के प्रादुर्भाव को
कविता के रूप में प्रस्तुत करने की
कोशिश की है|


गीता-प्राकट्य
आबालवृद्ध  नर नारी जानें
कथाओ का संग्रह है भारत
उन कथाओं में महाकथा है
नाम है जिसका महाभारत|

सौ पुत्रों वाले एक पिता थे
नाम था जिनका धृतराष्ट्र
पुत्र-प्रेम की मिसाल बने
किस्सा जाने सारा राष्ट्र|

आँखों से वे अन्धे थे
सन्तति-प्रेम में भी थे अन्धे
विचार किया न भले बुरे का
बँट गए सारे अपने बन्दे|

सहस्र पुत्र धृतराष्ट्र के
इकट्ठे कहे गए कौरव
शकुनि के बहकावे में
बन न सके भारत का गौरव|


धृतराष्ट्र के थे पाँच भतीजे
कहलाते थे वे पाँडव
धृतराष्ट्र अपने पुत्रों को रोक सके न
करवा बैठे घर में ही ताँडव|

सौ पुत्रों में एक पुत्र था
नाम था जिसका दुर्योधन
उस पुत्र के कुविचारों का
किया नहीं पिता ने संशोधन|

अनुजों की भार्या पर डाल नजर
कौरवों ने लाँघी सीमा मर्यादा की
द्रौपदी के साथ देख अभद्रता
पाँडवों ने लाँघी सीमा धैर्य की|

शायद विधि का था यही विधान
प्रयासों से भी न हुआ संधान||

सबसे बड़ा युद्ध धरती का
रणभूमि बन गया कुरुक्षेत्र
कौरव-पाँडव का भिड़ंत हुआ
युद्धभूमि कहलाया धर्मक्षेत्र|

सारे बन्धु-बाँधव बँट गए
सेना बँटी दो भागों में
किसी ने चुना कौरवों को
कोई गया पाँडव में|

युद्धभूमि में पाँडव अर्जुन ने
सारथी श्रीकृष्ण से किया अनुरोध
देखना चाहता आदरणीय जनों को
हो गया जिनसे अनसुलझा विरोध|

युद्ध आरम्भ करने से पहले
अर्जुन ने कौरव-सेना पर डाली नजर
पितामह और गुरु को देखा
उठने लगा दुविधा का भँवर|


युद्धक्षेत्र में किया अच्युत(कृष्ण) ने
दुविधा का समाधान
दिया उपदेश सांसारिकता का
वही बना गीता का ज्ञान|

गान हुआ श्रीविष्णु के मुख से
श्री-मद्-भगवद्-गीता बना
पवित्र, श्रेष्ठ और महान||

              ऋता शेखर मधु

8 टिप्‍पणियां:

  1. गीता-प्राकट्य पर लिखी गयी यह कविता सहज शब्दों में
    वर्णित एक अनुपम रचना है|
    बधाई हो|

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन प्रस्तुति.
    जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. जीवन दर्शन से परिपूर्ण सुंदर रचना के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपने तो बहुत सुंदर लिखा है...
    बहुत-बहुत बधाई...अच्छी रचना के लिए और जन्माष्टमी के पावन पर्व पर....

    उत्तर देंहटाएं
  5. संतोष जी,रवि रंजन जी,कुँवर कुसुमेश जी,शरद जी एवं वीना जी,
    आप सबने मेरी कविता को पसन्द किया, इसके लिए दिल से आभारी हूँ|आशा है आगे भी आपके बहुमूल्य विचार मिलते रहेंगे|
    सादर
    ऋता

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर कविता के माध्यम से स्पष्ट और संक्षिप्त वर्णन के लिए बधाई |

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!