बुधवार, 25 जनवरी 2012

आजान गूँजें मस्जिदों में, मंदिरों में घंटियाँ

चित्र गूगल से साभार
नटखट कन्हैया जा रहे हैं, धर्म से अनजान हैं|
बैठे सकीना गोद में वे,  मंद  सी  मुस्कान   है||

यह दृश्य है अद्भुत अलौकिक, बन रहा पहचान है|
ऐसे सलीमों को नमन है,  देश  की  ये  शान  हैं|१|


भारत वतन समभाव का है,हैं विविध से गीत भी|
सद्भाव बहता है रगों में,    है  दिलों  में  प्रीत  भी|

आजान गूँजे मस्जिदों में,  मंदिरों   में   घंटियाँ|
मीठा मधुर संगीत बन के, भाव प्यारा हो बयाँ|२|

ऋता शेखर 'मधु'

!!!गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!


10 टिप्‍पणियां:

  1. नटखट कन्हैया जा रहे हैं, धर्म से अनजान हैं|
    बैठे सकीना गोद में वे, मंद सी मुस्कान है||
    बहुत गहन , स्पष्ट

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  2. बहुत सुन्दर भाव ..हाईगा भी बहुत सुन्दर

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें

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  3. आपके इस उत्‍कृष्‍ठ लेखन का आभार ...

    ।। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं ।।

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  4. सार्थक संदेश देती सटीक अभिव्यक्ति।

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  5. सुन्दर ,सटीक
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें

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  6. इस बेजोड़ सार्थक रचना के लिए साधुवाद

    नीरज

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  7. शानदार प्रस्तुति है |
    जय अक्षर जय शब्द विधान,
    जय जन जाग्रति जय उत्थान .तभी बने गणतंत्र महान .

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  8. बहुत शानदार प्रस्तुति,सार्थक सटीक भावपूर्ण अच्छी रचना,..
    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

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  9. बेहतरीन कविता है दीदी!!

    :):)

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