गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

संज्ञा या विशेषण





संज्ञा या विशेषण

दुनिया में
दो तरह के लोग होते हैं
कुछ वाकई दुखी होते हैं
पर झलकने नहीं देते,
कुछ दुखी होने का
दिखावा करते हैं
इस दिखावे पर उन्हें मिलता है
बेचारा या बेचारीका उपनाम|

कुछ वाकई सोए रहते हैं
और जग जाते हैं
हल्की दस्तक से,
जो दिखावा करते हैं
वे ढोल पीटने पर भी
नहीं जग सकते|

कुछ प्रभु में
दिल से अन्तरात्मा से
आस्था रखते हैं,
कुछ जोर जोर से भजन गाते
घंटियाँ बजाते
पुजारी का खिताब
जीत लेते हैं|

कुछ वाकई काम करते हैं
साफ सुथरे सलीकेदार,
कुछ दिखावा करके
कामकाजू शब्द से
विभूषित हो जाते हैं|

प्रकृति भी इससे अछूती नहीं
सूर्य बेचारा
सबको ऊर्जा देता
तपिश झेलता है
रौशनी देने के लिए
जलता रहता है,
किन्तु सुन्दर और शीतल
ये विशेषण होते हैं
चन्द्रमा के साथ
जो न सुन्दर है
न ही शीतल है
ये गुण उसे
मिलते तो सूरज से ही हैं न!

अब सोचना ये है
संज्ञा बना जाए
या विशेषण???

ऋता शेखर मधु

8 टिप्‍पणियां:

  1. विचारों का मंथन शुरू हो गया| बढ़िया पोस्ट है | मेरा ख्याल है की विशेषण ही बना जाये!

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  2. संज्ञा तो हूँ ही , विशेषण चाहिए

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  3. संज्ञा के साथ विशेषण भी हो तो बात बने ..

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  4. दिखावा हर कहीं है..... निश्चित रूप से संज्ञा बनाना सार्थक होगा

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  5. अच्छा प्रश्न उठाया है,वाह.

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  6. जो दिखावा करते हैं
    वे ढोल पीटने पर भी
    नहीं जग सकते|

    सच है
    बहुत बढ़िया विचार मंथन

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