शनिवार, 24 मार्च 2012

भगतसिंह


भगतसिंह (२३ मार्च पर विशेष)


आज़ाद भारत की कहानी
लिखी जिसने देकर कुर्बानी
परतंत्रता की बेड़ी को तोड़
किया जनमानस को उद्वेलित
वह शूरवीर बलिदानी था
नाम था उसका भगतसिंह
साथ सुखदेव राजगुरु के
ब्रिटिश शासन को ललकार दिया
हँसते हँसते फाँसी का फंदा
गले में वरमाला सा डाल लिया|

ऋता शेखर 'मधु'

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर.....

    ना भूलें उनकी कुर्बानी...
    शत शत नमन...

    सस्नेह.

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  2. देश के वीर बाकुँरो को शत-शत नमन..

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  3. बहुत सुंदर..शहीदों को नमन..

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  4. बहुत सुन्दर..
    लेकिन आज कितने लोग इन्हें याद करते हैं, ये देख बहुत दुःख होता है और गुस्सा भी आता है!!
    मैं तो बहुत ज्यादा प्रभावित रहता हूँ इनके विचारों से!!

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