शनिवार, 5 मई 2012

जो निगाहें झुकाए वो हया तो मिले




इक जया तो मिले
इक दया तो मिले

आशियाँ जो बनाए 
वो बया तो मिले

जो निगाहें झुकाए
वो हया तो मिले

कहकहे भी लगाए
वो समाँ तो मिले

वो कलम को चलाए
सरस्वती तो मिले

जो टके भी कमाए
वो रमा तो मिले

जो भजन भी सुनाए
वो सुरीली मिले

घर-चमन में सजे
वो सजीली मिले

पाक में हो निपुण
अन्नपूर्णा मिले

लोग देखें अपलक
उर्वशी भी मिले

जो स्कुटी ले उड़े
वो बसंती मिले

पैंजनी भी बजाए
वो नुपुर तो मिले


प्यार पलते जहाँ
वो जिया तो मिले

लिपटी जो रहे
वो लता तो मिले

ढूँढती हर गली
वो पता तो मिले

हमकदम जो बने
वो वधू तो मिले

सर्व गुण संपन्न
वो कहाँ से मिले:)


ऋता शेखर 'मधु'

17 टिप्‍पणियां:

  1. हमकदम जो बने
    वो वधू तो मिले

    सर्व गुण संपन्न
    वो कहाँ से मिले:)... बहुत सही लिखा ... संभव ही नहीं

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  2. जी, बिलकुल सही कहा ..... कुछ ऐसी ही चाहतें हैं आजकल .....

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  3. इक जया तो मिले
    इक दया तो मिले
    आशियाँ जो बनाए
    वो बया तो मिले

    बहुत सुंदर बेहतरीन रचना //

    MY RECENT POST ....काव्यान्जलि ....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

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  4. जो स्कुटी ले उड़े
    वो बसंती मिले
    :-)

    बड़ा कठिन है ऐसी का मिलना ऋता जी................

    अब जो बेटे खोज के लायेंगे उनमे एक भी गुण ऐसा मिला तो खुश हो लेंगे..
    :-)

    सस्नेह.

    उत्तर देंहटाएं
  5. expression ने आपकी पोस्ट " जो निगाहें झुकाए वो हया तो मिले " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    जो स्कुटी ले उड़े
    वो बसंती मिले
    :-)

    बड़ा कठिन है ऐसी का मिलना ऋता जी................

    अब जो बेटे खोज के लायेंगे उनमे एक भी गुण ऐसा मिला तो खुश हो लेंगे..
    :-)

    सस्नेह.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आशा बिष्ट ने आपकी पोस्ट " जो निगाहें झुकाए वो हया तो मिले " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    ACHCHHA LIKHA HAI MA'AM...

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  7. वाह! ऋता जी,
    कमाल की प्रस्तुति है आपकी.

    तमन्नाएं भी एक से बढ़कर एक.

    आपने बहुत खूबसूरती से दर्शाया है.

    अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

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  8. आशियाँ जो बनाए
    वो बया तो मिले

    छोटी छोटी पंक्तियों में गहन बात ... सब कुछ तो एक साथ मिलना असंभव है

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  9. इतने गुण एक साथ मिल जाएँ - असंभव! असंभव!

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  10. सर्व गुण संपन्न
    वो कहाँ से मिले:)

    इस प्रश्न का जवाब कहाँ से मिले...आहूत बढ़िया रचना...

    नीरज

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  11. हमकदम जो बने
    वो वधू तो मिले

    सर्व गुण संपन्न
    वो कहाँ से मिले.

    मनमुताबिक तलाश जल्द पूरी हो.

    शुभकामनायें.

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  12. हमकदम जो बने
    वो वधू तो मिले

    सर्व गुण संपन्न
    वो कहाँ से मिले:)

    लाजवाब प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका इंचजार रहेगा । धन्यवाद । ।

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  13. सर्वगुण सम्पन्न तो ईश्वर भी नहीं होते।
    अच्छी रचना।

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  14. आपकी आशा पूरी हो ....
    शुभकामनायें !

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