सोमवार, 20 मई 2013

निमिया के छाँव तले...



चैत के महीने में नीम की पत्तियाँ, फूल, फल, छाल आदि का प्रयोग खाने या लगाने के लिए किया जाता है|
इससे काफी रोग दूर भाग जाते हैं| यह सबसे अधिक आक्सीजन देने वाला भी पेड़ है अतः इसके नीचे समय बिताने से शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है| इसी आधार पर प्रस्तुत है एक गीत...

निमिया के छाँव तले...

चल री सखी
हम डालें झूले
निमिया के छाँव तले

ए री सखी
हम काहे डालें झूले?
निमिया के छाँव तले

सुन री सखी
चैत में झूमें
नरम कोमल कोंपल
फाहे सा एहसास मिले
शुद्ध हवा साँस मिले
खा लो जो कोंपले
खून भी साफ मिले
निमिया के छाँव तले|१|

चल री सखी
हम चुन लें फुलवा
निमिया के छाँव तले

ए री सखी
हम काहे चुन लें फुलवा?
निमिया के छाँव तले

सुन री सखी
अंजुरी भर चुन लो
भीनी दुधिया फुलवा
पीसो और लगाओ सखी
सूरत निखरती चले
निमिया के छाँव तले|२|

चल री सखी
हम खाएँ निम्बोरी
निमिया के छाँव तले

ए री सखी
हम काहे खाएँ निम्बोरी?
निमिया के छाँव तले

सुन री सखी
थोड़ी सी मीठी
थोड़ी थोड़ी कड़वी
जाए जो तन में
रोग भागे क्षण में
काया निरोगी बने
निमिया के छाँव तले|३

चलो री सखियो
चलो सहेलियों
हम डालें झूले
फुलवा को चुन लें
निम्बोरी भी गुन लें
निमिया के छाँव तले
गाँव सा प्यार पले
निमिया के छाँव तले|४
...........ऋता शेखर ‘मधु’

21 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 22/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (22-05-2013) के कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 पर भी होगी!
      सादर...!

      हटाएं
    2. शुक्रिया यशोदा जी...शशि जीः)

      हटाएं
  2. नीम की पत्तियाँ, फूल, फल, छाल आदि सभी बहुत ही लाभदायक होते है ..सही कहा ऋता ..उससे संबंधित रचना भी बहुत सुन्दर

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  3. आपकी यह रचना कल मंगलवार (21 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण के "विशेष रचना कोना" पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  4. नीम के सारे गुण समेट अच्छी रचना का सृजन किया है ।

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  5. ए री सखी
    हम काहे डालें झूले?
    निमिया के छाँव तले ..

    बहुत ही सुन्दर छंदों में बाँधा है ... नीम के इन विभिन्न आयामों को ...
    नीम की सुगंध इतनि महकती है मन में भर लेने का मन करता है ...

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  6. बहुत सुंदर .बेह्तरीन अभिव्यक्ति शुभकामनायें.

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (08-04-2013) के "http://charchamanch.blogspot.in/2013/04/1224.html"> पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
    सूचनार्थ...सादर!

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  8. चलो दी....निमिया के छाँव तले....
    :-)


    सस्नेह
    अनु

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  9. चल री सखी
    हम खाएँ निम्बोरी
    निमिया के छाँव तले.....सच में मन हो गया नि‍मि‍या तले जाने का

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  10. waah didi..bahut sundar kavita...
    mere gaaon mein ek aisa hi neem ka bada sa ped hai....kitna khelte the wahan jab bachpan mein jaate the...wo yaad aa gaya..

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

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