रविवार, 22 सितंबर 2013

ज़िन्दगी की जंग कभी होती नहीं आसान


आसमाँ में टूटता एक सितारा देखा
दुआ माँगता हुआ एक बेचारा देखा

सबको ही पड़ी है अपनी अपनी
किसी के लिए न कोई सहारा देखा

ज़िन्दगी की जंग कभी होती नहीं आसान
जीतने की जिद में दौड़ता एक हरकारा देखा

दिल हथेली पर लिए घूमता था वो
किरचों को चुनता प्यार का मारा देखा

चुप रहकर जिएँ तो जिएँ कैसे
बिन बोले होता नहीं गुजारा देखा|
...................ऋता

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना है दी....
    आसमाँ में टूटता एक सितारा देखा
    विश माँगता हुआ एक बिचारा देखा

    यहाँ अगर विश की जगह "दुआ मांगता हुआ एक बेचारा देखा" कर दें तो ??
    गुस्ताखी माफ़ :-)

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - सोमवार - 23/09/2013 को
    जंगली बेल सी बढती है बेटियां , - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः22 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra





    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुभानाल्लाह बहुत ही खुबसूरत |

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही खुबसूरत रचना हैं |सुंदर ब्लॉग -
    “अजेय-असीम{Unlimited Potential}”

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिल हथेली पर लिए घूमता था वो
    किरचों को चुनता प्यार का मारा देखा...
    लाजवाब !

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!