शनिवार, 4 जनवरी 2014

नए वर्ष का हुआ विहान - चौपई छंद

चौपई छंद - १५ मात्राओं के साथ अन्त में गुरु लघु



१.
नए वर्ष का हुआ विहान|
गिरधर छेड़ो अपनी तान||

नहिं नारी का हो अपमान|
कुछ ऐसा ही रचो विधान||

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२.
वर्ष नवल आया है द्वार|
लेकर खुशियों का भंडार||
अनुपम है रब का उपहार|
सूर्य नवल कर लो स्वीकार||

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३.
ज्यूँ कान्हा की बात सुनाय
हिय राधे का बहु अकुलाय
विकल नैन पुनि भरि भरि जाय
प्रीत विदुर की समझ न आय|

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४.
गाए ग़ज़ल हृदय की पीर|
कविता में नैनों का नीर||
व्यथित नज़्म खो देती धीर|
छंद बने बातों के वीर||

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५.
तरुवर से मिलती है छाँव|
कहत सरोवर धो लो पाँव|
सरस सुहावन मेरा गाँव|
पथिक सदा रुक पाते ठाँव|
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६.
धरती का प्यारा परिधान|
गेहूँ सरसों झूमे धान|
गुलमोहर ने रख ली शान|
रखें सदा भारत की आन|
******ऋता

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर चौपाई छंद !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति
    नई पोस्ट नया वर्ष !

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  2. नववर्ष के आगमन पर बहुत सुन्दर रचनाएं ...
    बहुत बेहतरीन...
    नववर्ष मंगलमय हो...
    http://mauryareena.blogspot.in/
    :-)

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  3. काफी उम्दा प्रस्तुति.....

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (05-01-2014) को "तकलीफ जिंदगी है...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1483" पर भी रहेगी...!!!

    आपको नव वर्ष की ढेरो-ढेरो शुभकामनाएँ...!!

    - मिश्रा राहुल

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  4. सभी छंद लाजवाब ... हर रस समेटे ...

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आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!