मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

बागों में पतझर का हो रहा श्रृंगार...


फूलों की डोली ले आया है बहार

बागों में पतझर का हो रहा श्रृंगार 

गुँथे हैं चम्पई गेंदों के पुष्प हार

माँ शारदे, तुझे नमन है बारम्बार !


पीत वसन मुख चंद्र सा है

कर में वीणा रसरंग सा है

बैर, मक्को,कंद का चढ़ रहा आहार

धूप चंदन से सुगंधित हुआ है वंदनवार!


खिल रही हैं वाटिका मे अनगिनत कलियाँ

गूँज उठे भँवरों के स्वर मँडरायी तितलियाँ


खेत भी इतरा रहा कर सरसो  संग विहार

नव कोंपल भी धरती को देखें निहार निहार !


श्रृंगारित है नायिका ले पिया मिलन की आस

कँगना की झंकार में भरा हुआ विश्वास

कहीं विरह की ज्वाला दहके है बार बार

हवा बासंती चूम रही पँखुड़ियों को सँवार !

...............ऋता

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी कृति बुधवार 5 फरवरी 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर.......बसंतोत्सव की शुभ कामनाएं ......

    उत्तर देंहटाएं
  3. चतुर्दिक शृंगार की मनोरम कल्पना !

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या खूब वसंत !
    बहुत शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  5. बसंत आगमन पर सुन्दर रचना..
    बसंत पंचमी कि हार्दिक शुभकामनाएँ....
    http://mauryareena.blogspot.in/
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!