मंगलवार, 3 जून 2014

आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ











आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

नील मेघ सा रंग है तेरा गहरी झील सी आँखें
तेरे रक्त अधर पर मैं रहस्य मुस्कान निखार दूँ
आ तुझे मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

ओ नील गगन के टिमटिम तारे कौन सा रंग है तेरा
तेरे नटखट कौतुक किरणों में रंग रुपहले निखार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

जित देखूँ तित ही बहार है अगनित रंग हैं तेरे
वसुधा के हरित आँचल में बहुरंगे कुसुम पसार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

रंगों के मनभावन छिटकन से तितली के पंख सजे
कलियों के संग रंग राग भर उनमें मैं विस्तार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

जब जब रोता है अम्बर इक इंद्रधनुष उगता है
सात रंगों के दामन में मैं खुशियों को विस्तार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

जितना ऊपर अम्बर है उतना ही गहरा है सागर
निस्सीम धरा पर सीप मंजरी का अतुल भंडार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ

जब जब आती रात अमा की कोई रंग न सूझे
स्याह रंग की कालिख को जगजीवन से निसार दूँ
आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ
.............ऋता शेखर 'मधु'

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (04-06-2014) को "आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ " (चर्चा मंच 1633) पर भी है!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर भाव संयोजन

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  3. कुछ कमेंट्स फेसबुक समूह के.....

    डॉ॰ सुरेश सारस्वत अद्भुत.....अद्भुत....बेहतरीन ...उन्वान को पूर्ण सार्थकता देती हुई सुन्दर भावपूर्ण सृजन ...बधाई
    16 hours ago · Unlike · 1

    ऋता शेखर 'मधु' आ० डॉ॰ सुरेश सारस्वत जी...प्रोत्साहन हेतु तहेदिल से आभार...सादर नमन !!
    16 hours ago · Like

    Kavita Sud सुन्दर, भावपू्र्ण शब्द चयन द्वारा मन को छूती हुई रचना सार्थक अभिव्यक्ति
    16 hours ago · Like

    प्रो. विश्वम्भर शुक्ल सुन्दरम ,अनुपम रचना आपकी ,कुछ पद्यांश तो अलौकिक अर्थ प्रस्तुत करते दिखते हैं _
    जब जब रोता है अम्बर इक इंद्रधनुष उगता है
    सात रंगों के दामन में मैं खुशियों को विस्तार दूँ
    ------- एक नया अर्थ इन्द्रधनुष का ,शायद ही किसी ने इस दृष्टिकोण से लिखा होगा

    जितना ऊपर अम्बर है उतना ही गहरा है सागर
    निस्सीम धरा पर सीप मंजरी का अतुल भंडार दूँ
    ------------- सुन्दर बहुत खूब

    जब जब आती रात अमा की कोई रंग न सूझे
    स्याह रंग की कालिख को जगजीवन से निसार दूँ
    ----------------------- अमावस का आना बिना किसी रंग के और स्याह रंग को जीवन से निखारना अद्भुत

    आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
    कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ
    ---------------------- बहुत सुन्दर चित्र रचे आपने लेखनी और भावों की तूलिका से ,शुभम !
    16 hours ago · Like

    ऋता शेखर 'मधु' आ० Kavita Sud जी...बहुत आभारी हूँ आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए...सादर नमन !!
    15 hours ago · Like

    ऋता शेखर 'मधु' आ० प्रो. विश्वम्भर शुक्ल सर...आपकी प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ...आगे और अच्छा लिखने की प्रेरणा देती हुई आपकी विस्तृत व्याख्या के लिए हृदय से आभार...सादर नमन !!
    15 hours ago · Like

    Rajesh Kummar Sinha बहुत ही सुंदर ,अप्रतिम और अद्भुत सृजन ,ऐसा लगता है मानो हरेक शब्द कुछ कह रहे हों ,बोल रहे हों ,,,,कुछ नया अर्थ दे रहे हों ,,,,,,,,,,,,उनवान को बिलकुल सार्थक करती हुई रचना ,,बेहतरीन ,सृजन ,,बधाई आपको
    15 hours ago · Like

    Rajkumar Dhar Dwivedi आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
    कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ/ wahhhhhhji
    14 hours ago · Like

    Anita Mehta वाह बहुत सुंदर भक्ति रचना.
    12 hours ago · Like

    महेश सोनी 'दर्पण' वाह वाह वाह... बहुत ही लाजवाब मनभावन सुंदर भावपूर्ण गीत रचना सृजन.. रचना के लिए बधाई.. नमन..
    12 hours ago · Like

    Madan Prakash Singh इस असाधारण, अप्रतिम रचना की जितनी भी तारीफ करूं कम है . अति सुन्दर लेखन की बधाई .
    6 hrs · Like

    Ashwani Kumar वाह..उन्वान को सार्थक करती..सात्विक प्रेम की शशक्त अनुभूति कराती अति सुन्दर रचना ... .. सादर वंदे
    3 hrs · Like

    Sushma Joshi Dubey आ तुझको मैं अपनी कूची में उतार लूँ
    कान्हा तेरी प्रीत को मैं रंगों से सँवार दूँ.......behad sunder
    3 hrs · Like

    Gp Pareek ati uttam.
    3 hrs · Like

    Prahlad Pareek bahut khub
    3 hrs · Like

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  4. अनुपम भावों का संगम ....

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  5. जितने सुन्दर आपकी कूची में रंग हैं...उतने ही खूबसूरत शब्दों में मन के भाव को पिरोया है आपने...| हार्दिक बधाई...|

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  6. जितने सुन्दर आपकी कूची में रंग हैं...उतने ही खूबसूरत शब्दों में मन के भाव को पिरोया है आपने...| हार्दिक बधाई...|

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