शनिवार, 12 जुलाई 2014

दुनिया तो रैन बसेरा है


दुनिया तो रैन बसेरा है
क्या तेरा है क्या मेरा है
जरा सीख लो मानवता
जरा सरल भी बन जाना
फिर तो नया सवेरा है

दुनिया के रेलम ठेला में
ब्रह्म मुहुर्त की बेला में
रब का अंतस में रख लो
कर्मों में रत होकर देखो
यह सुकून का डेरा है

दुनिया में हैं दीन दुखी
उनको गले लगा लेना
बिन आँचल के मासूमों को
झट से गोद उठा लेना
आशिष का भाव घनेरा है

छल द्वंद से दूर रहे जो
शुभ कर्मों में चूर रहे जो
सही वक्त पर सही काम हो
हाथ में श्रम मन में राम हो
चतुर्दिक मान का घेरा है

 क्या तेरा है क्या मेरा है
दुनिया तो रैन बसेरा हे

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन प्राण साहब जी की पहली पुण्यतिथि और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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