रविवार, 3 अगस्त 2014

मित्रता


मित्रता
...............
सूरज को देखो जरा
वह दोस्ती निभाता है
जाने से पहले चाँद को 
रौशनी दे जाता है
सागर चाँद से मिलने
पूनम को जाता हे

कौन कहता धरती से
अम्बर कभी मिलता नहीं
दर्द बाँटने वह क्षितिज पर
तत्परता  से आता है
मेघों मे भाव है
दोस्ती का चाव है
वसुन्धरा के कदमों में
आकर बिखर जाता है

भँवरे भी बाग से 
दोस्ती निभाते हैं
गुनगुन संगीत वे
फूलों को सुनाते हैं
चिड़ियों ने भोर से
दोस्ती निभाई है
चाँदनी निशा से मिलने
तैयार होकर आई है

दोस्ती बस दोस्ती है
यहाँ कोई एहसान नहीं
बाँट लो दर्द और खुशी
संबल बन खड़े हो जाओ
कृष्ण सुदामा के जैसा
रहे न मन मलाल कोई !!
*ऋता*
मित्रता दिवस की शुभकामनाएँ !!

4 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्ती बस दोस्ती है
    यहाँ कोई एहसान नहीं.... सच मित्रता दिवस की शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
    अपने ब्लॉग को ब्लॉगप्रहरी से जोड़ने के लिए, यहाँ क्लिक करें http://www.blogprahari.com/add-your-blog अथवा पंजीयन करें http://www.blogprahari.com/signup .
    अतार्जाल पर हिंदी को समृद्ध और सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता आपके सहयोग के बिना पूरी नहीं हो सकती.
    मोडरेटर
    ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क

    उत्तर देंहटाएं
  3. मित्रता दिवस की भीनी भीनी खुशबू बेखेरती सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. दिल से लिखी गयी और दिल पर असर करने वाली रचना...

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!