बुधवार, 21 जनवरी 2015

बसंत को नेवता

सूरज ने भेजा
बसंत को नेवता

मीठी बयार में
आम्रतरु झूलते
कोयलिया गा रही
बौर भी फूलते

भीनी सुगंध को
कुँज भी सेवता

झूलों में पेंग है
गेंदें खिल रहे
मक्को और बेर संग
ज्ञान गान गूँज रहे

मीठी बयार में
स्वप्न नाव खेवता

आँगन की चिड़िया
भोर में कूदती
नीम की टहनियाँ
मुनिया को चूमती

पीले परिधान में 
जाग रहे देवता
*ऋता शेखर मधु*

5 टिप्‍पणियां:

  1. अभी तो शिशिर की मार झेल रहे हैं, फिर भी वसंत का गीत सुखकर है।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 22-01-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1866 में दिया गया है
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

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