शनिवार, 18 जून 2016

मोहपाश-लघुकथा

 मोह पाश
आज घर में बहुत चहलपहल थी। विदेश से छोटा बेटा और बहु आ चुके थे। आवभगत में कोई कमी न रहे उसके लिए सासु माँ एक पैर पर खड़ी थी। बड़ी बहु और बेटा भी बड़े शौक से अगवानी कर रहे थे।
बुआ जी ने हँसते हँसते कहा- क्या बात है भाभी, बहु पर कितना प्यार लुटाओगी।
सासु माँ ने बड़े प्यार से कहा- यह बिचारी तो कभी कभी आती है। सालों भर तो यह प्यार बड़ी के हिस्से आता है।
मुस्कुरा कर बड़ी बहु ने सर हिलाया।
खा-पी कर सभी आराम करने चले गए।
तनिक देर बाद सासु माँ की आवाज आई-बहु , एक गिलास पानी देना जरा।
बिलकुल शांति छाई रही। सासु माँ ने दुबारे आवाज लगाई।

बड़ी पानी लेकर गई और प्यार से बोली- माँ जी, मैंने सोचा कि बिचारी कभी कभी आती है तो सास की सेवा का पुण्य उसे भी मिलना चाहिए, यह पुण्य तो मैं साल भर बटोरती ही रहती हूँ।
सासु माँ निःशब्द रह गई।
------ऋता शेखर मधु-------

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 19 जून 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 'पिता 'पॉवर' है - फादर्स डे पर विशेष ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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