रविवार, 30 अप्रैल 2017

प्राथमिकता-लघुकथा

प्राथमिकता

"कुमार साहब, ये फाइलें हैं। आप सबकी सॉफ्ट कॉपी बनाकर अधिकारी को मेल कर दें, आज ही, अर्जेंटली।"
"लेकिन सर, कल मेरी बेटी का छेका है।आज बहुत सारे काम है। मुझे छुट्टी चाहिए थी।"
"कुमार साहब, अब ये आप तय करें कि सरकारी और घर के काम में आप किसे ज्यादा महत्व देंगे।"
कुमार साहब के सहयोगी ने थोड़े मजाकिया अंदाज़ में कहा, "यार कुमार,ये तो सरकारी काम है, हो ही जायेगा। तुम नहीं करोगे तो कोई और कर देगा।मैं तो कहता हूँ छुट्टी ले लो।"
"यही बात तो घर के काम पर भी लागू हो सकती है।"
कहते हुए कुमार साहब ने घर पर फोन लगाया।
"मैं आज छुट्टी नहीं ले सकता। सरिता, तुम संभाल लेना।"
-ऋता शेखर "मधु"

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’देश के दुश्मन - बाहर भी, भीतर भी : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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