शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

कोमल हथेली

कोमल हथेली
छह महीने बाद नौकरी से घर लौटे हुए पति अविनाश ने एकांत होते ही रमोला का हाथ पकड़ना चाहा, किन्तु यह क्या! रमोला ने हाथ परे करते हुए मुस्कुराकर पति को गलबहियाँ डाल दी| अविनाश को रमोला का व्यवहार कुछ अजीब सा लगा|
''ठीक तो हो'' अविनाश ने प्यार से पूछा|
''जी, बिल्कुल ठीक हूँ'', कहते हुए उसके थरथरा गए होंठ और आँखों में आई नन्हीं बूँद ने उसके झूठ की चुगली कर ही दी|
अविनाश ने गले से उसकी बाँहों को हटाते हुए हथेली पलट दी उसकी| चिथड़ी हथेलियों ने सच की गवाही दे दी|
शादी के सिर्फ एक वर्ष ही हुए थे| नौकरी पर रहने का इन्तेजाम ठीक से नहीं कर पाया था तो घरवालों के पास ही पत्नी को छोड़ गया था|
रमोला का हाथ पकड़े पकड़े वह माँ के पास गया|
''माँ, कमली कहाँ है? दिख नहीं रही|''
''बेटा, उसे काम छोड़े तो छह महीने हो गए|''

अविनाश के सामने सब कुछ स्पष्ट हो गया|
''माँ, इस छुट्टी के बाद जाऊँगा तो रमोला को साथ ले जाऊँगा|''
''क्यों बेटा, हमसे कोई भूल हुई क्या|''
''नहीं, भूल तो मुझसे हुई| रमोला के पिता ने मुझे कोमल हथेली सौंपी थी| इन हथेलियों को कोमल रखना मेरी जिम्मेदारी है'', कहकर अविनाश ने माँ के सामने रमोला की हथेली फैला दी|
-ऋता शेखर 'मधु'

07/10/17
आश्विन शुक्ल तृतीया-२०७४

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (04-11-2017) को
    "दर्दे-ए-दिल की फिक्र" (चर्चा अंक 2778)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    कार्तिक पूर्णिमा (गुरू नानक जयन्ती) की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वाह , बेहतरीन अभिव्यक्ति !! आभार आपका

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