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शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

आया बसंत

 



बासंती हाइकु

1

खिले जलज

पवन मलयज

आया बसंत।

2

पीत पराग

ऋतुराज का पाग

है अनुराग।

3

मंद पवन

अनुरागी छुअन

बासन्ती मन।

4

विरही मन

कहाँ पाए बसंत

रंग बेरंग।

5

वाणी की वीणा

मंद मंद रागिनी

खोया है मन।

6

सरसों फूल

पीले परिधान में

सजती धरा।

7

खिले कुसुम

उमंग की बहार

राग बसंत।

8

खिली कलियाँ

निखरा है बसंत

गाये भ्रमर।

9

हिली टहनी

झरी है झर-झर

हीरक कनी।

10

बासंती घट

सृष्टि ने रंग लिया

मन का पट।

11

बाँटती हवा

हर तरफ इत्र

खिले हैं पुष्प।

12

हवा जो चली

नाच उठी क्यारियाँ

झूमा बसंत।

13

प्रीत का रंग

लगे जो एक बार

छूटे न संग।

14

आम्र वाटिका

कोयल की कूक में

बासंती गीत।

15

भीनी सुगंध

आमों के बौर कहे

जी लो बसंत।


ऋता शेखर

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

भारत वंदना

 माटी के कण-कण में देखो, हुआ सुवासित चंदन।

गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।


उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, सुंदर सभी दिशाएँ।

अरुणोदय या हो अस्ताचल, दृश्य मनोहर लाएँ।।

जहाँ खड़ा है अटल हिमालय, गङ्गा बहती है पावन।

हर मौसम है यहाँ सुहावन, रहे शरद या सावन।।

सागर की लहरें भरती हैं, पग में शीतल स्पंदन।

गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।


वेद पुराण हमें सिखलाते, सरल मार्ग अपनाना।

रामायण से हमने अपने, आदर्शों को जाना।।

श्लोकों के हर बीज मंत्र में, ऊर्जा अमित समायी।

दया धर्म का पाठ पढ़ाकर, मानवता ले आयी।।

कहते कृष्ण सार जीवन का, मानो इसे न क्रंदन।

गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।


ओज भरी वीरों की धरती, सदियों से हम पाए।

सम्राटों के किस्से सुनकर, गौरव गाथा गाए।।

संस्कारित शिक्षित मानवता, जन जन के मन जागे।

सब मिलकर जब कदम बढ़ाएं, होगा भारत आगे।।

लहराए सब ओर तिरंगा, ऐसा हो अभिनंदन।

गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।

ऋता शेखर 'मधु'