पृष्ठ
(यहां ले जाएं ...)
मुख्य पृष्ठ
---मेरा उद्गार---
▼
शनिवार, 11 जनवरी 2025
पाँच लघुकथाएँ - ऋता शेखर
›
1. असर कहाँ तक "मीना अब बड़ी हो गई है। उच्च शिक्षा लेने के बाद नौकरी भी करने लगी है। कोई ढंग का लड़का मिल जाये तो उसके हाथ पीले कर दें !...
6 टिप्पणियां:
रविवार, 8 दिसंबर 2024
मध्य में क्या
›
जिंदगी की स्लेट पर जन्म या मृत्यु लिखना आरम्भ और अंत है। क्या इतना ही जीवन है? नहीं...मध्य वृहद उपन्यास है। जन्म तो संयोग है मृत्यु एक वियो...
6 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 20 सितंबर 2024
डमरू घनाक्षरी
›
डमरू घनाक्षरी - शृंगार रस वर्णिक छंद- 8, 8, 8, 8 की एक पंक्ति हर अठकल अमात्रिक - त्रिकल त्रिकल द्विकल से चार समतुकांत पंक्तियाँ अनत जगत यह, ...
2 टिप्पणियां:
गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024
महिला दिवस विशेष १- भारतीय सिनेमा के निर्माण में महिलाओं की भूमिकाएँ
›
भारतीय सिनेमा के निर्माण में महिलाओं की पार्श्व भूमिकाएँ – ऋता शेखर ‘मधु’ सिनेमा को सबसे लोकप्रिय कला माध्यम के रूप में देखा जाता है। एक व...
2 टिप्पणियां:
रविवार, 5 फ़रवरी 2023
जब हम सीख लेते हैं
›
निभ जाते हैं रिश्ते जब हम सीख लेते हैं दोषों को नजरअंदाज़ करना जी लेते हैं तमाम उम्र जब हम सीख लेते हैं बेवज़ह ही मरना मिलती है सफलता जब हम...
10 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें