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सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

नव कोंपल से सजता, लगता तरु का हर डाल मनोहर है



मेरे तीन दुर्मिल सवैया छंद...
१.
अनुशासित प्रांत महान बने, यह बात सदा सच ही रहती
सदभाव बसे जिस देश सदा, दुनिया बस भारत ही कहती
जँह प्रीत नदी बन के बहती अरु वेद ऋचा नभ में उड़ती
वह पावन भूमि तपोवन सी, दिल से दिल की कड़ियाँ जुड़ती
२.
नव कोंपल से सजता, लगता तरु का हर डाल मनोहर है
खग-गान हवा तब गूँज उठे, लगता यह गायन सोहर है
जब धान पके, हर खेत सजे, चमकी सरसों पुखराज बनी
परिधान धरा कुछ यूँ पहनी, सुषमा उसकी अधिराज बनी
३.
फगुनाहट में ऋतुराज चले, धरती कुसुमी बन डोल रही
कलियाँ खिलतीं, तितली उड़ती, अलिगूँज सखी-मन खोल रही
हर बौर सजी अमिया महकी, बगिया कुहु कोयल बोल रही
मनभावन मौसम, मंद हवा, कचनार कली रस घोल रही

---ऋता शेखर मधु

बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

मेरी अब तक प्रकाशित पुस्तकें

मेरी अब तक प्रकाशित पुस्तकें...सभी सम्पादक महोदय/महोदया की 

हार्दिक आभारी हूँ जिन्होंने मेरी रचनाओं को प्रकाशन के योग्य 

समझा...सभी पब्लिशर्स को हार्दिक धन्यवाद !!

सभी सह-रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!...ऋता शेखर 'मधु'

उत्साहवर्धन के लिए सभी पाठकगणों का हार्दिक आभार !!















प्रिंट प्रकाशन-
1.भाव कलश(२९ रचनाकारों के ताँका कविता)सम्पादक-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु',डॉ भावना कुँअर
2.शब्दों के अरण्य में(६० कवियों का कविता-संग्रह)- सम्पादन-रश्मिप्रभा
3.खामोश खामोशी और हम( कविता-संग्रह) सम्पादन- रश्मिप्रभा
4.संरचना (वर्ष २०११ के १०० लघुकथाकारों की लघुकथाओं का संग्रह)सम्पादक-डा कमल चोपड़ा
5.माला के मोती-दिलबाग विर्क जी के हाइकु-संग्रह में मेरी समीक्षात्मक भूमिका)
6.उदंती मासिक पत्रिका के मई अंक में मेरी कविता
7.युग चेतना(अमरीकी त्रैमासिक पत्रिका-अक्टूबर) में लघुकथा
8.यादों के पाखी(४८ रचनाकारों का साझा हाइकु-संग्रह)सम्पादक-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'/डॉ भावना कुँअर/डॉ हरदीप कौर संधु
9.पगडंडियाँ(२८ कवियों की कविता-संग्रह)सम्पादक-अंजु चौधरी,रंजू भाटिया,मुकेश कु० सिन्हा
10.लघुकथाएँ-जीवन-मूल्यों की--सम्पादक-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु',सुकेश साहनी


शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

अज्ञान में संतान तेरी, ज्ञान की मनुहार है - ऋता



सरस्वती वंदनाहरिगीतिका छंद   

यह शीश कदमों पर नवा कर, कर रहे हम वन्दना |
माँ शारदे, कर दो कृपा तुम, ज्ञान की है कामना||

अज्ञान में संतान तेरी, ज्ञान की मनुहार है |
उर में हमारे तुम पधारो, पंचमी त्यौहार है ||

धारण मधुर वीणा किया है, दे रही सरगम हमें|
संगीत से ही तुम पढ़ाती, एकता हर पाठ में||


बस शांति हो संदेश अपना, दो हमें यह भावना|
भारत वतन ऐसा बने, हो, सब जगह सद्‌भावना||

पद्‌मासिनी करिये कृपा अब, हो सुवासित यह जहां
हंस पर जब माँ विराजें , शांति छा जाती यहाँ||

माता करो उपकार हमपर, कर रहे हम साधना|
साकार हों सपने सभी के, कर रहे आराधना||

इस ज़िन्दगी की राह भीषण, पत्थरों से सामना|
नहिं ठोकरें खा के गिरें, माँ, बुद्धि दे सँभालना||

तेरे बिना कुछ भी नहीं हम, सब जगह अवरोध है|
हों ज्ञान-रथ के सारथी हम, यह सरल अनुरोध है||

तूफ़ान में पर्वत बनें हम, शक्ति इतनी दो हमें|
तेरे चरण- सेवी रहें हम, भक्ति भी दे दो हमें||

करते तुझे शत-शत नमन हम, हो न तम का सामना|
आसक्त तुझमें ही रहें हम, बस यही है कामना||

ऋता शेखर 'मधु'

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

वैलेंटाइन्स डे स्पेशल—कुछ टिप्स








वैलेंटाइन्स डे स्पेशलकुछ टिप्स

जो चाहे तुम्हें
तुम भी चाहो उसे
धोखा न देना|

ढेर सा प्यार
बनाता परिवार
कभी न खोना|

दिल,दिल है
नहीं यह खिलौना
तोड़ न देना|

जिसे भी चाहो
किसी राह पे उसे
छोड़ न देना|

निःस्वार्थ प्यार 
मुश्किल से मिलता
याद रखना|

प्यार जो करो
आँसुओं का तोहफ़ा
कभी न देना|

दिल होता है
भावों भरा कलश
फोड़ न देना|

दिल से रोए 
आपके लिए कोई
मौका न देना|

---ऋता शेखर मधु



शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

दरख्तों ने जीर्ण पत्ते झाड़े हैं



रुख़सत होने वाले अब जाड़े हैं
दरख्तों ने जीर्ण पत्ते झाड़े हैं
आने वाला बहारों का मौसम है
शाखों पर नव कोंपलें मुस्कुराएँगे
घूँघट में छुप चुकी रंगीन कलियाँ हैं
भँवरे भी अब गुनगुनाएँगे
पकृति ने फूलदार चूनर काढ़ा है
ऋतुराज  पीत साफ़े में आएँगे
हवाओं ने भी रंगत बदली है
खग भी खुशी से चहचहाएँगे
शुभ्र नभ के नील विस्तार पर
नन्हें तारे भी खूब टिमटिमाएँगे
तितलियों ने रंगीन फ्राक पहने हैं
बच्चे बागों में खिलखिलाएँगे
प्रेमी-जोड़े खुशी से चहके हैं
सपने अँखियों में झिलमिलाएँगे
वीणा शारदे की बजने को है
सुरमयी धुन फ़िजा में लहराएँगे
नव पकृति संग नव गीत लिए
हम भी तो स्वागत में गीत गाएँगे|

ऋता शेखर 'मधु'