बुधवार, 21 दिसंबर 2011

बड़े सयाने,फिर भी मासूम




पिछले दिनों किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा|वापसी के रास्ते में सोचा,अपने सुपुत्र की गृहस्थी भी देखती चलूँ जहाँ दो-तीन बैचलर बच्चे एक फ्लैट लेकर रहते हैं और जौब करते हैं|बस, ये सृजन उसी वक्त का है-

बड़े सयाने
फिर भी मासूम
असमय बड़े होते ये बच्चे
आधुनिकता की त्रासदी कहूँ
या समय की माँग
ममता की छाँव छिन गई है
देख उन्हें दिल भर आता है
सिर्फ फोन का ही नाता है|

बड़े सयाने
पर ज्यूँ सर रखा गोद में
लगा, लेटा है
वही पाँच साल का
मासूम बच्चा
अपनी हर बात कहने को आतुर
एक अव्यक्त उपालम्भ था
आँखों में चमका इक मोती
दिख न जाए माँ को
इसका भी ख्याल था
पर माँ तो माँ है|

कहो या न कहो
नम आँखों को लाख छुपाओ
बातों से भी खूब रिझाओ
किन्तु उस हँसती व्यथा को
छुपा नहीं सकते
क्यूँकि माँ तो माँ है|

कुक का बना
खाते ये बच्चे
कुछ दिन ही सही
मिलेगा ममता का खाना
एक संतुष्टि
दिखती चेहरे पे
आफिस के लज़ीज़ खाने
अब नहीं मन भाते|

ज्यूँहि, चलने का वक्त आया
आँखों में उदासी तिर आई
बड़े यत्न से उसे छुपाया
पर माँ तो माँ है|


हाथ झुके थे
चरण-स्पर्श को
आशीर्वाद का हाथ भी
रख दिया था सर पे
पर क्यूँ कुछ देर
उठ न पाए
डर था
अश्रु –बिन्दु दिख न जाए
पर माँ तो माँ है|

उम्र इतनी भी बड़ी नहीं
विवाह बंधन में बँध सके
अकेलेपन को झेलते
खुद को सँभालते
बड़े सयाने
फिर भी मासूम
असमय बड़े होते ये बच्चे|

ऋता शेखर ‘मधु’

12 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा …………उन क्षणो को शब्दो मे पिरोना भी आसान कहाँ होता है।

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  2. बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति..जब बच्चे दूर हो जाते हैं, तो मन को दुःख होता है, पर उनके भविष्य के बारे में सोचकर संतोष करना पडता है..

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  3. माँ की ममता ने शब्दों का रूप ले लिया है ....

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  4. बड़े सयाने
    पर ज्यूँ सर रखा गोद में
    लगा, लेटा है
    वही पाँच साल का
    मासूम बच्चा
    अपनी हर बात कहने को आतुर
    एक अव्यक्त उपालम्भ था
    आँखों में चमका इक मोती
    दिख न जाए माँ को
    इसका भी ख्याल था
    पर माँ तो माँ है|... kramik soch maa ki hi ho sakti hai

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  5. मां की ममता सबसे प्यारी..आपने तो बहुत प्यारा लिखा ..बधाई.

    'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

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  6. पर माँ तो माँ है|

    ओह! माँ के गहन जज्बातों की कोई थाह ही नही है.
    भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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  7. आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार 22-12-2011 के चर्चा मंच पर भी की या रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  8. sahi kha aapne mera bhi jaipur men hae to aesa lga jaese aapne mujhe padh loya ho.............

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  9. माँ तो फिर भी माँ है , उससे कैसे छिप सकते थे आंसू या व्यथा !

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  10. बहुत ही सुंदर एवं मार्मिक प्रस्तुति । मर्मस्पर्शी रचना ..

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  11. दिल को छूती मार्मिक रचना.''
    मेरी नई रचना के लिए "काव्यान्जलि" मे click करे

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  12. ek dam sahi kaha main bhi office ke karan ghar se bahar rhta hu :(

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