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सोमवार, 26 दिसंबर 2011

किशोरों के लिए

मेरी आज की कविता बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए है जिनके सामने साल बदलते ही परीक्षा ओर प्रतियोगिता-परीक्षाओं की लम्बी कतार लगने वाली है|
निराशा की घटा हटा के रखो
धैर्य का दामन पकड़  के  रखो,
सब्र की मुट्ठी जकड़  के  रखो,
उम्मीदों के चिराग जला के रखो,
खुशियों के  दीप जगमग करेंगे|

निराशा की घटा हटा के  रखो,
प्यार की ज्योत जला के  रखो,
इच्छा की रंगोली सजा के रखो,
आनंद के सागर छलक  उठेंगे|

क्रोध की अग्नि बुझा के रखो,
वैर  के  बीज  सुखा के रखो,
बातों के तीर  छुपा  के रखो,
हर्ष  के  पौधे  लहक  उठेंगे|

प्रेम की धारा  बहा  के  रखो,
विश्वास की नींव जमा के रखो,
आशा की किरण जगा के रखो,
जीत  के  झंडे  लहर  उठेंगे|

श्रम के मोती चमका के रखो,
लगन की लौ बचा  के  रखो,
प्रयास की सीढ़ी लगा के रखो,
शौर्य  के सूरज  दमक उठेंगे||

       ऋता शेखर मधु