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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

चाँद का सफ़र


अपनी ही धुन में वह चला जा रहा था
शम्मा बन के बस वह जला जा रहा था

छोटी सी दुनिया सितारों की बसे बस
ख्वाब इतना सा मन में पला जा रहा था

शीतल बन के वह तो बरफ़ सा रहा था
पा कर के तपिश वह गला जा रहा था

चंदा को इतना सा गुमाँ भी नहीं था
सूरज द्वारा वह तो छला जा रहा था

चंदा भला इतना मायूस क्यों है
आसमाँ को यह भी खला जा रहा था

चलते चलते जब वह निढाल हो गया
क्षितिज की आगोश में वह ढला जा रहा था


ऋता शेखर मधु