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शनिवार, 24 सितंबर 2011

''डॉटर्स डे'' विशेष कविता



बिटिया मेरी
ओ लाडली बिटिया मेरी
तुम हो, मेरे जीवन की खुशी
बड़ी प्यारी लगती है
तुम्हारी भोली निश्छल हँसी
ईश्वर ने वरदान दिया
तुम आई दुनिया में मेरी
जी चाहता है दुनिया में तेरी
खुशियाँ ही खुशियाँ मैं भर दूँ
तमन्नाएँ पूरी कर होठों पर तेरे
मुस्कान ही मुस्कान मैं मढ़ दूँ
सारे दुख हर, झोली में तेरी
कलियाँ ही कलियाँ मैं धर दूँ
तेरे भविष्य की चादर में
सितारे ही सितारे मैं जड़ दूँ
हजारों दीप रौशन कर, राह तेरा
उजालों से मैं जगमग कर दूँ
तेरे मीठे मीठे सपनों में
परियाँ ही परियाँ मैं बुला दूँ
तेरे पथ के सारे काँटे चुन
फूल ही फूल मैं बिछा दूँ
कुकू की मीठी मधुर गुंजन
श्रुति बना हवा में मैं भर दूँ
तुम्हारी खुशी सब चाहें
श्रे‌य इसका मैं सब को दूँ
अमित स्नेह-आशीष का हाथ
सर पर तुम्हारे मैं धर दूँ|

है ईश्वर से दुआ ये मेरी
पूरी हों तुम्हारी आकांक्षाएँ
दुख-निराशा की परछाई भी
कभी तुम्हारे न पास आए
मधु सी मिठास इस कदर भरे
कड़वाहट जगह ही न बना पाए
मैं ईश्वर नहीं चमत्कारी भी नहीं
फिर भी जी चाहे, भाग्य तुम्हारा
सुनहरे कलम से मैं लिख दूँ|

ऋता शेखर मधु