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!!!होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!
लो, फिर आ गई
रंगों से भरी होली
ऋतुराज तैयार खड़े हैं
जीवन में भरने को रंगोली
फाल्गुन के अवसान दिवस को
बुराइयाँ होलिका संग जली
नव वर्ष नव खुशी की पिटारी
चैत्र ने प्रथम दिवस को खोली
मस्ती में थिरकने लगी है
जवान वृद्ध बच्चों की टोली
लोटपोट होने लगे सब
सुन हँसी मजाक की बोली
रंग जमाने लगी है
देवर भाभी की ठिठोली
होली खास हो जाती
जब दुल्हन हो नव्या नवेली
भिगोने को जी करता
क्योंकि सूरत उसकी भोली
नूतन वस्त्रों से तन सजे
सजी आशीर्वादों की डोली
पूए पकवानों के थाल सजे
सजी ललाटों पे गुलाल की रोली
शिकवों को भूल गले मिलो
खुशियाँ ही खुशिया मिली
होली का मजा दुगुना हो जाए
रंग हो जब ‘इको फ्रेंडली’
हास परिहास वही अच्छे
जो वार करे न दिल पे
हो सभ्य प्रिय और रसीली|
ऋता शेखर ‘मधु’