चौपई छंद - १५ मात्राओं के साथ अन्त में गुरु लघु

१.
नए वर्ष का हुआ विहान|
गिरधर छेड़ो अपनी तान||
नहिं नारी का हो अपमान|
कुछ ऐसा ही रचो विधान||
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२.
वर्ष नवल आया है द्वार|
लेकर खुशियों का भंडार||
अनुपम है रब का उपहार|
सूर्य नवल कर लो स्वीकार||
******************
३.
ज्यूँ कान्हा की बात सुनाय
हिय राधे का बहु अकुलाय
विकल नैन पुनि भरि भरि जाय
प्रीत विदुर की समझ न आय|
*******************
४.
गाए ग़ज़ल हृदय की पीर|
कविता में नैनों का नीर||
व्यथित नज़्म खो देती धीर|
छंद बने बातों के वीर||
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१.
नए वर्ष का हुआ विहान|
गिरधर छेड़ो अपनी तान||
नहिं नारी का हो अपमान|
कुछ ऐसा ही रचो विधान||
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२.
वर्ष नवल आया है द्वार|
लेकर खुशियों का भंडार||
अनुपम है रब का उपहार|
सूर्य नवल कर लो स्वीकार||
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३.
ज्यूँ कान्हा की बात सुनाय
हिय राधे का बहु अकुलाय
विकल नैन पुनि भरि भरि जाय
प्रीत विदुर की समझ न आय|
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४.
गाए ग़ज़ल हृदय की पीर|
कविता में नैनों का नीर||
व्यथित नज़्म खो देती धीर|
छंद बने बातों के वीर||
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५.
तरुवर से मिलती है छाँव|
कहत सरोवर धो लो पाँव|
सरस सुहावन मेरा गाँव|
पथिक सदा रुक पाते ठाँव|
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६.
धरती का प्यारा परिधान|
गेहूँ सरसों झूमे धान|
गुलमोहर ने रख ली शान|
रखें सदा भारत की आन|
******ऋता