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मंगलवार, 20 नवंबर 2012

भर गई झोपड़ी

एक बार इस लिंक पर अवश्य जाएँ...लिखना तभी सफल होता है जब उसे अच्छे और सुधि पाठक पढ़ें...आपका सहयोग हमें उत्साहित करेगा..धन्यवाद एवं आभार!!
http://www.infibeam.com/Books/shabdon-ke-aranya-mein-editor-rashmi-prabha/9789381394137.html

शब्दों के अरण्य में कुलाँचे भरती कविताएँ-एक झलक(यहाँ क्लिक करें)

 
भर गई झोपड़ी
गुरुकुल में सभी शिष्यों का अन्तिम दिन था| सभी उदास भी थे और खुश भी| उदास इसलिए कि सभी सखा बिछुड़ रहे थे और खुश इसलिए कि वे अपने घर...अपने परिवारजनों के पास लौट रहे थे| जब विदाई का वक्त आया तो सभी शिष्य गुरु जी के पास उनका आशीर्वाद लेने पहुँचे| गुरु जी ने प्रेमपूर्वक आशीर्वाद दिया | उन्होंने कहा कि तुम सभी हर क्षेत्र में तरक्की करो| 
अन्तिम परीक्षा के रूप में गुरु जी ने सभी शिष्यों को को एक-एक रुपया दिया और कहा कि सभी इस रुपया से ऐसी वस्तु खरीदकर लाओ जिससे मेरी पूरी झोपड़ी भर जाए| सभी शिष्यों ने रुपया ले लिया और सोचने लगे कि ऐसी कौन सी वस्तु हो सकती है| एक घंटे बाद सबको एकत्रित होना था|
     एक घंटे बाद सभी शिष्य आ गए|गुरु जी ने कहा कि सब अपनी-अपनी वस्तुएँ दिखाएँ|
एक शिष्य एक बोरी फरही(मूढ़ी) लेकर आया था किन्तु उससे झोपड़ी का एक कोना ही भर सका| एक शिष्य धुनी हुई रूई लेकर आया फिर भी झोपड़ी खाली रही| इस तरह से सभी ने कुछ-कुछ दिखाया| एक शिष्य चुप खड़ा रहा| गुरुजी ने उससे पूछा कि वह क्या लाया| शिष्य ने आगे बढ़कर एक छोटी सी मोमबत्ती निकाली और उसे जला दिया| प्रकाश से पूरी झोपड़ी  भर गई| गुरु जी ने उठकर शिष्य को गले लगा लिया|
फिर उन्होंने शिष्य से पूछा कि इस प्रकाश को वह किस रूप में देखता है|
शिष्य ने कहा-ज्ञान-प्रकाश के रूप में|
गुरुजी ने गदगद होकर कहा-जाओ वत्स, संसार से अज्ञान का अन्धकार दूर करो, मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है, अच्छा सोचोगे तभी अच्छा करोगे, इससे वैर-भाव दूर होंगे और अच्छे समाज का निर्माण हो सकेगा|
गुरुजी का आशीर्वाद लेकर शिष्य ज्ञान-प्रकाश से जग को आलोकित करने चल पड़ा|

ऋता शेखर मधु