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शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

वर्ण सितारे - हाइकु संग्रह

 आज ब्लॉगिंग डे है| ब्लॉग पर आये दस वर्ष बीत चुके हैं| आप सभी मित्रों के उत्साहवर्धन से लिखती रही| यहाँ पर कई विधाओं से परिचित हुई| सर्वप्रथम हाइकु से लेखन की शुरुआत हुई थी| जब पुस्तक प्रकाशन की ओर बढ़ी तो सबसे पहले हाइकु संग्रह प्रकाशित करना था|

मित्रों , मेरा हाइकु संग्रह प्रकाशित हो चुका है| आज ब्लॉगिंग डे पर यह पोस्ट लगाते हुए खुशी महसूस हो रही| यह पुस्तक शीघ्र ही अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध होगी| आप चाहें तो मेल पर सीधे मुझे भी लिख सकते हैं | आशा है पुस्तक को आपकी सराहना मिलेगी| धन्यवाद ः)



सोमवार, 21 सितंबर 2020

हिन्दी पखवारा की रचना-२ हाइकु


बहुत दिनों बाद हाइकु
1


पचपन में
बचपन की लोरी
पोते- पोतियाँ।






2


लम्बी हैं राहें
दामन में सुमन
पग में छाले।






3


तरुणावस्था
सपनीले नयन
नभ का चाँद।





4


जेठ की धूप
सुर्ख गुलमोहर
नव उल्लास।





5


आयी बारिश
नभ और नयन
अंतर कहाँ।






6


हरी पत्तियाँ
गुलाबों की महक
घर अँगना।




7


विशाल वट
मूल मूल है कहाँ
जाँच एजेंसी।






8



उगी रोशनी
छुप रहा अँधेरा
हर्ष का गीत|



--ऋता शेखर 'मधु'

गुरुवार, 22 जून 2017

यादें हरसिंगार हों

दोहे 
 1
दादी अम्मी टोकते, टोकें अब्बूजान
लगा सोलवां साल अब, आफत में है जान
2
महँगाई की मार से बिलख रहा इंसान
जीवनयापन के लिए आफत में है जान

 3
इधर उधर क्या ढूँढता, सब कुछ तेरे पास
नारियल के बीच बसी, मीठी मीठी प्यास

 4
यादें हरसिंगार हों, वादे गेंदा फूल
आस बने सूरजमुखी, कहाँ टिके फिर शूल
5
कड़ी धूप की लालिमा दिल में है आबाद
गर्मी में आती सदा गुलमोहर की याद
6
चुप रहना अद्भुत कला, जान न पाये आप
मनमोहन से सीख कर, मन में ही करिये जाप ऋता
7
 हृदय पुष्प को खोलकर, बोले अपना हाल
बिन गुलाल के मैं सखी, हुई शर्म से लाल
8 गुणीजनों के साथ हों, जब अच्छे संवाद
समझो माटी को मिला, उर्वरता का खाद
9
 नित प्रातः हरि नाम से, दिन को मिले मिठास
थाली को ज्यों गुड़ मिले, भोजन बनता खास
10
 कहो कौन किसके लिए जग में रोता यार
अपने अपने स्वार्थ में जीता है संसार
11
निज गुण के जो हैं धनी, झेलें नहीं अभाव
खुद से वह रखते परे, दूसरों का प्रभाव
-ऋता
==============================


कुण्डलिया ...

सावन आया झूमकर, नाचे है मन मोर
नभ में बादल घूमते, खूब मचाते शोर
खूब मचाते शोर, गीत खुशियों के गाते
तितली भँवरे बाग़, हृदय को हैं हुलसाते
मीठे झरनों का राग, लगे है सुन्दर पावन
नाचे है मन मोर, झूमकर आया सावन
-ऋता

================================

 हाइकु-

वृक्ष सम्पदा
हर मनु के नाम
एक हो वृक्ष

अश्व लेखनी
सरकारी कागज
दौड़ते अश्व
ऋता शेखर 'मधु'


सोमवार, 13 जनवरी 2014

मेरे हाइकु-जोशीले पग


इसमे एक हाइकु की अंतिम पंक्ति दूसरे हाइकु की प्रथम पंक्ति है

१.

जोशीले पग
वतन के रक्षक
रुकें न कभी|


२.

रुकें न कभी

धड़कन दिलों की

सूर्य का रथ|

३.
सूर्य का रथ
उजालों की सवारी
धरा की आस|

४.
धरा की आस
नभ से मिली नमी
उर्वर हुई|

५.
उर्वर हुई
सुनहरी बालियाँ
स्वर्ण जेवर|

६.
स्वर्ण जेवर
झनके झन झन
वधु-कंगना|

७.
वधु कंगना
झूम उठे अँगना
घर की शोभा|

८.
घर की शोभा
मर्यादा का बंधन
गृह रक्षित|

९.
गृह रक्षित
देहरी पर दादा
अनुशासन|

१०.
अनुशासन
घर का आभूषण
घर चमके|

११.
घर चमके
अमृत वाणी बूँद
सदा अमर|
.......ऋता शेखर 'मधु'

मंगलवार, 5 नवंबर 2013

दीये ये कच्चे

1

दीये ये कच्चे

धुन के बड़े पक्के

बच्चों -से सच्चे |

2

नेह का दीप

घृत हो विश्वास का

अखंड जला|

3

चाक जो घूमा

सर्जक का सृजन

सुगढ़ दीप |

4

मिलके रहे

दीप तेल वर्तिका

तभी लौ बने |

5

चंदा को ढूँढ़े

दीपक की बारात

अमा की रात |

6

गौरवशाली

दीवाली में भारत

सौरभशाली |

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

हिन्दी दिवस पर समर्पित कुछ हाइकु-पुष्प...



हिन्दी दिवस पर समर्पित कुछ हाइकु-पुष्प...

१.

हिंद-संविधा

चौदह सितम्बर

हिन्दी दिवस|

२.

संविधा धारा

तीन सौ तेतालिस

वर्णित हिन्दी|

३.

राष्ट्र की भाषा

लिपि देवनागरी

बोलें तो हिन्दी|

४.

गरिमामयी

लेखन में सरल

सौम्य है हिन्दी|

५.

हिन्दी दीपक

रौशन हिन्दुस्तान

फैला उजास|

६.

सुख का मूल

भारतेन्दु को प्रिय

अपनी हिन्दी|

७.

माँ सी है प्यारी

मातृभाषा हमारी

जग में न्यारी|

८.

स्वदेशी हिन्दी

राष्ट्र का हो विकास

हिन्दी ही लिखें|

९.

रिश्ता प्रगाढ़

हिन्दी में जब बोलें 

सारे ही प्रान्त|

१०.

तुलसीदास

हिन्दी में रामायण

सब को मान्य|

११.

अ से अनार

इ से होती इमली

पढ़े विमली|

१२.

अपनी बोली

हिन्दी होती है खास

दिल के पास|

१३.

कर्ण को प्रिय

मिठास भरी हिन्दी

सहज ग्राह्‌य|

१४.

सुनो संतन

है मधुर गुंजन

हिन्दी भजन|

............ऋता शेखर 'मधु'

शनिवार, 25 मई 2013

लाल फूल सर्पीली पत्ती -गुलमोहर

स्वर्ग अप्सरा
गुलमोहर चुन्नी
ओढ़ के आई|१|

लाल सितारे
हरी चुनरी पर
लगते प्यारे|२|

धरा की गोद
करते अठखेली
स्वर्ग के फूल|३|

तपी धरती
लाल अँगार बना
गुलमोहर|४|

लावण्य भरा
अँखियों का सुकून
गुलमोहर|५|

सर्पीली पत्ती
नरम मुलायम
अदा दिखाए|६|

 तपिश भूला
ताज़गी से झूमता
देता संदेश|७|

रब ने भेजा
स्वर्ग से गुलदस्ता
भेंटस्वरूप|८|

गुलमोहर
सजा देता नैनों में
ख्वाब रंगीन|९|

...ऋता शेखर मधु..

इन हाइकुओं को हाइगा के रूप में यहाँ पर देखें...
http://hindihaiga.blogspot.in/2013/05/blog-post_25.html

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

वैलेंटाइन्स डे स्पेशल—कुछ टिप्स








वैलेंटाइन्स डे स्पेशलकुछ टिप्स

जो चाहे तुम्हें
तुम भी चाहो उसे
धोखा न देना|

ढेर सा प्यार
बनाता परिवार
कभी न खोना|

दिल,दिल है
नहीं यह खिलौना
तोड़ न देना|

जिसे भी चाहो
किसी राह पे उसे
छोड़ न देना|

निःस्वार्थ प्यार 
मुश्किल से मिलता
याद रखना|

प्यार जो करो
आँसुओं का तोहफ़ा
कभी न देना|

दिल होता है
भावों भरा कलश
फोड़ न देना|

दिल से रोए 
आपके लिए कोई
मौका न देना|

---ऋता शेखर मधु



शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

हाइकु में उतरी वर्षा रानी




१.
मेघ गरजा
टिप टिप बरसा
मन हरषा|
.      
पानी बरसा
सोंधी खुशबू उड़ी
धरती धुली|
३..
वन का मोर
घटाएँ घनघोर
भावविभोर|.
४.
घटा है आती
बिजली चमकाती
शोर मचाती|
५.
सह न सका
वाष्पकणों का बोझ
बरसा मेघ
६.
बहती धारा
सजाई बालकों ने
कागज़ी नाव|
७.
प्रथम बूँद
आम की डाल पर
क्यों भूले पेंगे|

८.
मेघों की कूची
आकाश केनवास
उकेरे चित्र|
९.
ऋतु सावन
शंकर सा पावन
हुलसा मन|
१०.
हरी चूड़ियाँ
खनकी कलाईयाँ
सावन आया|
११.
अम्बर धरा
बंधे एक सूत्र में
बरसात में|
१२.
छतरी तनी
नभ धरा के बीच
नया आकाश|
१३..
बारिश आती
महावर रचाती
गोरी शर्माती|
१४.
भरे पोखर
मेढक टर टर
गूंजा शहर|
१५.
बारिश रुकी
पत्तों ने टपकाए
बूँद के मोती|

१६.
दूर क्षितिज़
सतरंगी चुनर
इन्द्रधनुष|

ऋता शेखर 'मधु'