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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

लिपटे लटाई मंझ धागे,जीत का आगाज़ है


मकर संक्रंतिहरिगीतिका में


पावन  मकर संक्रांति  आया,  सूर्य  उत्तरायण  हुए|
उष्मा भरी अरु, ऊर्जा समायी, सब सरस सावन हुए||

खाते दही चूड़ा गजक हम, आज  यह  आहार  है|
सब देव जागे हैं जमीं पर, मन  रहा  त्योहार  है|१|


पंजाब में  यह लोहड़ी है,  बंग  में  संक्रांति है|
पोंगल तमिलनाडू मनाए, बिहु असम के संग है||

प्यारी पतंगें सज चुकी हैं,  यह  बना  परवाज़  है|
लिपटे लटाई मंझ धागे,  जीत  का  आगाज़  है|२|

ऋता शेखर मधु