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गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

हे प्रभु! उन्हें माफ कर...





हे प्रभु!
हे यीशु!
सदियों पहले
आवाज़ उठाई थी तुमने
अंधविश्वास के ख़िलाफ़
और ठोक दिए गए थे
कीलों से
सलीब पर,
तुम प्रभु थे
तुम्हें मालूम था
आने वाले समय में
हर वो मनुष्य ठुकने वाला है
जो आवाज उठाएगा
अराजकता के खिलाफ़
बेईमानी के खिलाफ़
हिंसा के ख़िलाफ़
झूठ के ख़िलाफ़
सलीब पर चढ़ा
वो कुछ कर न पाएगा
क्योंकि
सच्चाई विनीत होती है
ईमानदारी नम्र होती है
नैतिकता सर झुकाए रहती है
उनके पास वो गरल नहीं
जो सज़ा दे पाए
वो भी हाथ जोड़े
सिर्फ़ यही दोहराएगा
हे प्रभु ! उन्हें माफ़ कर!
उन्हें माफ़ कर!

ऋता शेखर मधु