बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

आसमाँ में चाँद ढाला कौन है



आसमाँ में चाँद ढाला कौन है
राह में दीपक जलाया कौन है

जिंदगी के पास अपना कौन है
बेसहारों का सहारा कौन है

जा छुपी है बादलों में चाँदनी
इस कदर उसको डराया कौन है

उस किनारे एक साया है खड़ा
पूछने को हाल जाता कौन है

बतकही में आज माहिर हैं सभी
अब जहाँ में चुप से सहता कौन है

झूठ में लिपटे हुए किरदार सब
आइना सच का दिखाया कौन है

है पड़ी अपनी सभी को आज ‘मधु’
अब यहाँ रिश्ते निभाता कौन है

मान लेते हैं सभी की बात को
हम बुरे ठहरे तो अच्छा कौन है

-ऋता शेखर ‘मधु’
2122 2122 212

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (13-10-2017) को
    "कागज़ की नाव" (चर्चा अंक 2756)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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