सोमवार, 12 नवंबर 2018

नैतिकता - लघुकथा


"ममा, आप पटाख़े ले आये, शाम को दो घण्टे का समय रखा गया है जहाँ सब मिलकर पटाख़े फोड़ेंगे"

"हाँ बेटा, सब तरह के पटाख़े लायी हूँ। सुतली बम, रॉकेट बम, धरती बम, आलू बम, मल्टीकलर फुलझड़ियां...सब कुछ।"


"ममा, आप कितने अच्छे हो। लव यू ममा। समय हो रहा पार्क में इकट्ठा होने का। आप तैयार हो जाएं, मैं भी आ रहा हूँ।"

पार्क में जाते हुए ममा ने मोबाइल ऑन किया।

छह सौ लाइक और पाँच सौ कमेंट्स आ चुके थे उनकी दस मिनट पहले डाली गई इस पोस्ट पर,
" पटाखों से वायु प्रदूषण होता है, बुज़ुर्ग, बच्चों और पशुओं का ख्याल रखें। पर्यावरण को शुद्ध रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।"
-ऋता

होते हैं दिखते नहीं, होते कई हजार



होते हैं दिखते नहीं, होते कई हजार।
मन के भीतर के बने, तोरण वाले द्वार।।
तोरण वाले द्वार,सहज होकर खुल जाते।
मन के जो शालीन, मार्गदर्शक बन आते।
कहे ऋता यह बात, व्यंग्य से रिश्ते खोते।
हवा गर्म या सर्द, नहीं दिखते पर होते।।
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नारंगी शुभता रचे, श्वेत दलों के साथ।
धरती पर गिरकर चढ़ें, शंकर जी के माथ।।
शंकर जी के माथ, निखर कर ये इतराते।
लिए समर्पण भाव, गौरवान्वित हो जाते।
मधुर धुनों के बीच, छाप छोड़े सारंगी।
पारिजात के मध्य, रचे शुभता नारंगी।।
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रातें ज्यों सूनी हुईं, पसर गयी है याद।
पल पल युग युग सा लगे, नीरव हैं संवाद।।
नीरव हैं संवाद, हृदय दूर कहीं भटके।
चिंतन की भरमार, लगाते सौ सौ झटके।
ऋता बघारे ज्ञान, मधुर हैं उसकी बातें।
विचरण करते छंद, हुईं सूनी ज्यों रातें।।

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धरती की है सम्पदा, हरे हरे ये पेड़
रे मनुज! निज स्वार्थवश, तू मत इनको छेड़।।
तू मत इनको छेड़, रूठ जाएगी छाया।
सूखेंगे जब खेत, चली जाएगी माया।
छींट ऋता कुछ बीज, जहाँ धरती है परती।
बढ़े मनुज की कीर्ति, हरी हो ज्यों ज्यों धरती।।
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बालक हो या बालिका, दोनों हैं अभिमान।
एकरूप शिक्षा मिले, इतना रखिए ध्यान।।
इतना रखिए ध्यान, पुष्ट हो जाएं तन से।
नज़रों से सम्मान, शिष्टता छलके मन से।
ऋता कहे यह बात, वही है अच्छा पालक।
सदा रखे समभाव, बालिका या हो बालक।।
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बुधवार, 24 अक्तूबर 2018

शरद चाँदनी

गीत का प्रयास

मौसम की आवाजाही में
हवा सर्द या हुई गरम

शरद चाँदनी शीतल बगिया
चमक उठे दुधिया कचनार
पुष्पदलों के हिंडोलों पर
झूल रहे नन्हें तुषार
अन्दर बाहर होती साँसें
अहसासों को करें नरम

शांत चित्त स्थिर मन प्याला
श्वेत क्षीर पर अमृत वर्षा
मेवा केसर पिस्ता मिलकर
दुग्ध अन्न का कण कण हर्षा
मुरली की मीठी धुन पर
दौड़ी राधा छोड़ शरम

जित देखें तित कान्हा दिखते
सभी गोपियाँ हुईं मगन
राधे राधे जपते कान्हा
एकाकार हुई प्रेम लगन
महारास की पावन बेला में
सुख की अनुभूति बनी परम

मन के सारे द्वेष मिटाकर
प्रभु में अपना ध्यान लगा
पूर्ण चन्द्र की सुन्दरता में
तन में आभा का ज्ञान सजा
इहलोक की झूठी माया से
स्वयं ही मिट जाएगा भरम

मौसम की आवाजाही में
हवा सर्द या हुई गरम

-ऋता

रविवार, 30 सितंबर 2018

धातु के बरतन - लघुकथा

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धातु के बरतन

सास और बहू का घर अलग अलग शहरों में था।


"मम्मी जी, आपने मलने के लिए सारे बर्तन बाई को दे दिए। बर्तनों पर खरोंच आएगी तो भद्दे दिखेंगे।" बर्तनों का अंबार देखकर सास के घर आई बहु आश्चर्य से बोल पड़ी।

"नहीं बहु, तेज रगड़ से ये और भी चमक उठेंगे, धातु के हैं न।"

"मम्मी जी, हमारे यहाँ तो आधे से अधिक बर्तन मुझे ही साफ करने होते हैं। काँच के शौफ़ियाना बर्तन, नॉन स्टिक तवा कड़ाही, ये सब बाई को नहीं दे सकती। खरोंच लगा देगी या काँच का एक भी गिलास या कटोरी टूट गयी तो डिनर सेट खराब हो जाएगा।"

"तभी तो आजकल के रिश्ते भी नर्म और नाजुक हो गए हैं। क्रोध या अहम की हल्की खरोंच भी उन्हें बदरंग कर सकती है।"

"क्यों, पहले रिश्ते बदरंग नहीं होते थे क्या मम्मी जी।"

"होते थे, पर उन रिश्तों को संभालने के लिए प्यार के साथ कठोरता से भी काम लिया जाता था और उनमें निखार बढ़ता जाता था। धातु के बर्तनों को अपने गिरने या रगड़े जाने की परवाह नहीं होती । "
-ऋता

शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

राशिफल - लघुकथा

राशिफल

सुबह के पाँच बजे से सुनंदा की दिनचर्या शुरू हो जाती। सबसे पहले बच्चों के मनपसन्द नाश्ते और लंच बनाती। उन्हें पैक करती। उधर बच्चे स्कूल के लिए स्वयं तैयार हो जाते। इतना करते हुए छह बज जाते और पतिदेव सुरेश भी तबतक उठकर चाय की फरमाइश कर देते। सास, ससुर और पति के लिए वह एक साथ ही चाय बनाती। इस दौरान उसके कान बालकनी की तरफ लगे रहते जहां गोल गोल मुड़ा ,नन्ही रस्सी में बंधा अखबार 'टप' से गिरता और वह दौड़ लगाकर बालकनी में पहुँच जाती क्योंकि एक बार अखबार पतिदेव के हाथ लगी तो मिलने से रही।
जल्दी जल्दी तीन चार पन्ने पलटती, कुछ पढ़ती और वापस अखबार मेज पर रखकर रसोई में लौट जाती। ऑफिस जाने के समय पति जब बाहर निकलने लगे तो सुनंदा ने धीरे से कहा,"आज वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना उचित रहेगा। ऐसा आपकी राशि में लिखा है।"
पति के क्रोधी स्वभाव से वह हमेशा सशंकित रहती थी।सुनंदा की ओर कड़ी नजर से देखकर सुरेश चले गए।
"बहु, राशिफल में आज धनप्राप्ति का भी योग है, ये क्यों नहीं बताया सुरेश को" , सास ने अखबार पढ़ते हुए पूछा।
सुनंदा मुस्कुराकर चुप रह गई।
शाम को सुरेश घर आये तो बहुत खुश थे। आते ही माँ को बताया," आज मुझे एक नई प्रोजेक्ट मिली है"
"बेटा, आज के राशिफल में यह भी लिखा था जिसे सुनंदा ने नहीं बताया।"
"माँ, आज ऑफिस जाते ही बॉस किसी बात पर उलझ गया। मैं भी उससे बड़ी बहस करना चाह रहा था तभी सुनंदा की बात याद आ गई और मैन धैर्य से काम लिया।उसके बाद बॉस ने वह प्रोजेक्ट मुझे ही देने का फैसला किया"
"अरे वाह !" कहती हुई सास ने बहु को हल्की मुस्कान के साथ देखा
"धनप्राप्ति से अधिक महत्वपूर्ण व्यवहार पर नियंत्रण है, मान गए तुम्हारी सोच को बहु।"
"जी" कहकर सुनंदा ने मेज पर गरम गरम चाय और पकौड़े रख दिये।
-ऋता

प्रॉपर्टी - लघुकथा

प्रॉपर्टी

"अभी आ रही हो, इतनी रात गए कहाँ थी तुम?"
"मैं तुम्हारी प्रॉपर्टी नहीं जो तुम मुझपर बन्धन लगाओ"
"प्रॉपर्टी कैसे नहीं, तुम्हारे पिता ने तुम्हे दान दिया है मुझे। तुम्हारे प्रति जिम्मेदारी है मेरी"
"अब भूल जाओ, कोर्ट ने धारा 497 हटाते हुए कहा है कि पत्नी पति की प्रॉपर्टी नहीं"
"हम्म"
"सुनो, कल तुम मेरे साथ चलना। पड़ोस में जो नया आदमी आया है, मुझे अजीब नजरों से घूरता है। तुम्हे मेरा साथ देखेगा तो डरेगा"
"रक्षा तो अपनी प्रॉपर्टी की की जाती है"
-ऋता