रविवार, 1 अक्तूबर 2017

निदान-लघुकथा


निदान

''रौल वन, टू, थ्री,फोर.....ट्वेन्टी सिक्स...''
''ये ट्वेन्टी सिक्स, अपराजिता स्कूल क्यों नहीं आ रही| पिछले पच्चीस दिनों से वह अनुपस्थित है''...हाजिरी लेते हुए ममता ने क्लास की लड़कियों से पूछा|
''उसकी शादी है दो दिनों बाद'' लड़कियों की ओर से आवाज आई|
''क्या !!, इतनी छोटी उम्र में शादी| सिर्फ चार महीने बाद उसे बोर्ड की परीक्षा देनी है|वह पढ़|ई में भी होशियार है| विद्यालय की उम्मीद टिकी है उसपर'' ममता को यह बात बिल्कुल भी हजम नहीं हो रही थी|
''मैम, इधर कई महीनों से जब वह स्कूल आती जाती थी तो कुछ लड़के उसे छेड़ते थे| वह रो देती थी|''
''तुमलोग उसके साथ क्यों नहीं जाती थी|''
''जाते थे, पर उनलोगों ने हमे डाँट दिया था कि ज्यादा साथ रहेगी तो तुमलोगों का भी स्कूल जाना मुश्किल कर देंगे|''
''अच्छा, उसके पिता क्या करते हैं''
''रिक्शा चलाते हैं|''
''हम्म, आज उसके घर ले चलना मुझे''
''जी मैम''
छुट्टी हुई तो ममता अपराजिता के घर गई| उसने देखा कि खिड़की से लगी वह खड़ी थी शून्य आँखों से ताकती हुई| ममता को देखते ही खुशी की लहर फेल गई चेहरे पर|
''मैम, मैं शादी नहीं करना चाहती| मुझे पढ़ना है| मुझे बचा लीजिए मैम|''
''मैम क्या करेंगी री| तू अपने घर चली जा, फिर जो जी चाहे करना'' कब पीछे उसका पिता आकर खड़ा हो गया ममता को पता नहीं चला|
ममता ने समझाने की कोशिश की किन्तु वह एक ही चीज बोले जा रहा था,''हमें अपनी बिटिया बहुत प्यारी है मैडम जी पर वे गुंडे खतरनाक हैं...''
शायद आगे कहने की जरूरत नहीं थी|
''अपराजिता, तुम्हारे नाम में ही विजय है, शादी के बाद पढ़ाई नहीं छोड़ना'', इतना कहकर वह उस बेबस शिष्या को छोड़कर जल्दी से बाहर निकल गई|इसका निदान कर पाने में वह खुद को असमर्थ महसूस कर रही थी|
ऋता शेखर 'मधु'





30/09/17

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (03-10-2017) को "ब्लॉग की खातिर" (चर्चा अंक 2746) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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