बुधवार, 6 जून 2012

अमरवाणी की कहानी















अमरवाणी की कहानी

विद्यालय में पढ़ी थी
महापुरुषों की अमरवाणी
जीवन में उसपर
अमल करने की ठानी
अच्छे कर्त्तव्य निभाने में
होती नहीं है हानि
ऐसा ही सदा
कहा करती थी नानी
आदर्शवाद का चोला पहन
बन गई ज्ञानी
सच्चाई की राह अपनाकर
बनी सीखों की दानी
प्रेम की धारा बहाई
प्रपंच नहीं जानी
अनुशासन को सदा माना
की नहीं मनमानी
संस्कारों को समझा
परम्पराओं को मानी
बड़े मनोयोग से
सभ्यता की चादर तानी
सारे अच्छे भाव अपनाकर
बनी गुणों की रानी
लगा नहीं था इस राह पर
पड़ेगी मुँह की खानी
सोचा था होगा सदा
दूध का दूध और पानी का पानी

पड़ा जब समाज से पाला
हुई बहुत हैरानी
मुँह में मीठी बातें थीं
मन में थी बेइमानी
अच्छाई को बुरा बताके
जाती थी बखानी
उपहास का तड़का लगाकर
कुछ ने जानी थी खिचड़ी पकानी
आदर्शवाद का चोला फट गया
सूरत हो गई रोनी
असमंजस में पड़ी
अब जीवन कैसे है जीना
अमरवाणी और नानी को छोड़
किसे होगा गुरु बनाना
उपहासियों को गुरु माना
बुराइयों को पहचाना
जैसे को तैसा का प्रथम पाठ था
आसान नहीं था अपनाना
अन्तरात्मा को रौंदना चाहा
हुई बहुत परेशानी
भारी पड़ गई फिर वही
गाँधी जी की वाणी
कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे
तो दूसरा था बढ़ाना
जिधर देखा सारे अपने थे
फिर किसको था सबक सिखाना
दुनिया के इस कुरुक्षेत्र में
अर्जुन की दुविधा जाना
गीता-ज्ञान का मर्म समझ गई
आदर्शवाद के फटे चोले पर
था व्यवहारिकता की पैबंद लगाना
सच्चाई की शरबत में चुटकी भर
झूठ का नमक था मिलाना
बनता यह जीवन रक्षक तरल
सीख न पाई बनाना

हम सच्चे तो सब अच्छे
यह बात सदा ही मानी
अच्छाई की यह परिभाषा
अब लगती है बेमानी
चित-पट, अच्छाई-बुराई
झूठ-सच, सुख-दुख, नेकी-बदी
सब जोड़े में आते
फिर क्यों सिखाया गया हमें
है एक ही चीज अपनाना
जीवन का फलसफ़ा कहता है
नेकी तो अच्छी है ही है
बदी को भी होगा
समझना समझाना
मधुमेह से बचना है तो
सिर्फ मिठाई नहीं है खाना
करेले का थोड़ा रस भी
रगो में होगा दौड़ाना
सभी पहलुओं का संतुलन बने
तभी पूरी होगी
जीवन जीने की कहानी|

ऋता शेखर मधु

13 टिप्‍पणियां:

  1. वाह:ऋता
    जीवन जीने की कहानी
    सुनी तुम्हारी जुबानी
    गीता-ज्ञान का मर्म हमने जानी
    दूध का दूध और पानी का पानी
    अजब ये संसार है
    अजब इसकी कहानी
    बहुत सुन्दर.......

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  2. अमरवाणी की बढ़िया कहानी,,,,,,
    बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,,,

    MY RESENT POST,,,,,काव्यान्जलि ...: स्वागत गीत,,,,,

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  3. जीवन का फलसफ़ा कहता है
    नेकी तो अच्छी है ही है
    बदी को भी होगा
    समझना समझाना

    ....बहुत खूब ! आज के समय का सत्य...बहुत सुन्दर..

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  4. बहुत कमाल कि लेखनी और भाव. अमरवाणी सुनते तो हैं पर जीवन में उस पर कायम रहना मुश्किल होता है. बहुत सशक्त रचना, बधाई.

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  5. बहुत ही भाव पूर्ण रचना|
    बहुत ही सटीक प्रस्तुति|
    जीवन जीने के सत्य को समझाने में सफल है यह रचना|
    सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को प्रेरणा देती रचना|
    बहुहुहुहु.......त बहुहुहुहु.......त....
    धन्यवाद एवं बधाई|

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  6. अच्छाई की सीख खुद में सवाल बन जाती है , आनेवाली पीढ़ी को क्या जवाब दे - खुद ही जवाब तलाशती है

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  7. कल 08/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. किताबी ज्ञान जिंदगी के अनुभवों से ताल मेल नहीं बैठा पाता ...अच्छी रचना

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  9. सभी पहलुओं का संतुलन बने
    तभी पूरी होगी
    जीवन जीने की कहानी|
    बहुत ही बढिया।

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  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी लगाई जा रही है!
    सूचनार्थ!

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  11. कागद की लेखी और आंखन देखि अक्सर विपरीत होते हैं....

    सादर.

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  12. बहुत सुन्दर ऋता जी....
    आपकी कहानी गाते चले जाने का दिल किया.....

    सस्नेह.

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