मंगलवार, 23 जून 2015

कलम...

Image result for kid picking up garbage

वह नन्हा सा बालक
उन्मुक्त आकाश में 
उड़ान का स्वप्न लिए
चुनता था दूध की पन्नियाँ
बीनता था टूटी काँच
जमा करता बिसलरी की बोतलें
जब बोरे भर जाते
शान से कंधे पे उठा 
इस तरह से चलता
जैसे कोई खजाना हाथ लगा हो
बेच देता बीस रुपए किलो के भाव से
अपनी जमा की हुई दौलत
और सौंप देता माँ को ले जाकर

बहुत दिनों से देख रही थी
विद्यालय की खिड़की से परख रही थी
बीच बीच में कनखियों से
वह भी देख लेता मुझे
एक दिन इशारे से बुलाया
बेटे, तुम विद्यालय आया करो
मेरी माँ बीमार रहती है
पैसे नहीं ले जाऊँगा तो खाऊँगा क्या
समझाया उसे-
सरकारी विद्यालय में पैसे नहीं लगते
स्कूल के बाद अपना काम भी करना
चमक उठी उसकी आँखें
मुस्कुरा उठे उसके होंठ
मैंने थमा दिया उसे एक कलम
और वह मासूम उसे यूँ निहार रहा था
जैसे शिक्षा के हिंडोले पर सवार हो
जाएगा वह बादलों के पार 
भर लाएगा तारों से भरी थैली
जब उसकी माँ देखेगी
तब सफल हो जाएगी
उसकी शैक्षिक उड़ान
वह भी तो बन जाएगा
समाज की पहचान
*ऋता शेखर मधु*

3 टिप्‍पणियां:

  1. काश आपकी यह कल्पना सत्य हो हर बच्चे के लिये
    और सभी बच्चो तक सरकारी योजनाओ का लाभ पहुच पाये

    उत्तर देंहटाएं
  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, जीना सब को नहीं आता - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!