सोमवार, 21 दिसंबर 2015

तुम हँसो तो साथ में हँसता जमाना

2122 2122 2122

देश को हर हाल में बस है बचाना
हो सके तो जान भी अपनी गँवाना

तुम हँसो तो साथ में हँसता जमाना
अश्क आँखों में सदा सबसे छुपाना

क्या खरी ही तुम सदा कहते रहे हो
मिर्च तुमको इसलिए कहता जमाना

वे चुरा लेते हमेशा भाव मेरे
है नहीं आसान अब इसको पचाना

चाँद में भी दाग है कहते रहे हो
बोल कर यह चाहते किसको बचाना

फावड़े यूँ ही नहीं थामे हैं हमने
जानता हूँ राह अपनी खुद बनाना

बेटियाँ फ़नकार हैं मानो इसे भी
पंख से उनको हमें ही है सजाना

*ऋता शेखर ‘मधु’*

2 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 23/12/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की जा रही है...
    इस हलचल में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...

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