शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2019

कैसा मिला है साथ

कैसा मिला है साथ

शीतल उष्ण मिल गए
जैसे तुम और हम
चक्र घूम कर बता रहा
कभी खुशी या गम
जो पिघला वह ठोस हुआ
जीवन अनबुझ राज
पतझर की लीला बड़ी
बजा बसन्त का साज
सूर्य बिना वह कुछ नहीं
चँदा का मन जान रहा
कहाँ तपन घट जाएगी
सूरज को भी भान रहा
एक दूजे बिन हैं अधूरे
पर मिलन की राह नहीं
अवनी अम्बर को देखो
क्षितिज की है थाह नहीं
विभा दिनकर मिलें कहाँ
सन्ध्या ने यह तय किया
आस निराश के मध्य जमी
आस्था ने सब कुछ जय किया
प्रीत मीत की हुई शाश्वत
बिना मिले दो तृप्त हुए
राधा कान्हा दूर दूर
प्रेम रूप संक्षिप्त हुए
कैसा मिला है साथ
मिले, पर हुए न पूरे
बना रहा अहसास
एक दूजे बिन हैं अधूरे
-ऋता शेखर 'मधु'




सभी बहनों सखियों को करवा चौथ की मंगलकामनाएं!! 🌹🌹🌝🌹🌹

5 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१८-१०-२०१९ ) को " व्याकुल पथिक की आत्मकथा " (चर्चा अंक- ३४९३ ) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  2. बहुत खूबसूरत रचना।
    दूर दूर पर पास पास।
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है 👉👉  लोग बोले है बुरा लगता है

    जवाब देंहटाएं
  3. राधा कान्हा दूर दूर
    प्रेम रूप संक्षिप्त हुए
    कैसा मिला है साथ
    मिले, पर हुए न पूरे

    जीवन इसी का नाम है, सादर ...

    जवाब देंहटाएं

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