बासंती हाइकु
1
खिले जलज
पवन मलयज
आया बसंत।
2
पीत पराग
ऋतुराज का पाग
है अनुराग।
3
मंद पवन
अनुरागी छुअन
बासन्ती मन।
4
विरही मन
कहाँ पाए बसंत
रंग बेरंग।
5
वाणी की वीणा
मंद मंद रागिनी
खोया है मन।
6
सरसों फूल
पीले परिधान में
सजती धरा।
7
खिले कुसुम
उमंग की बहार
राग बसंत।
8
खिली कलियाँ
निखरा है बसंत
गाये भ्रमर।
9
हिली टहनी
झरी है झर-झर
हीरक कनी।
10
बासंती घट
सृष्टि ने रंग लिया
मन का पट।
11
बाँटती हवा
हर तरफ इत्र
खिले हैं पुष्प।
12
हवा जो चली
नाच उठी क्यारियाँ
झूमा बसंत।
13
प्रीत का रंग
लगे जो एक बार
छूटे न संग।
14
आम्र वाटिका
कोयल की कूक में
बासंती गीत।
15
भीनी सुगंध
आमों के बौर कहे
जी लो बसंत।
ऋता शेखर

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