रविवार, 23 जुलाई 2017

रिमाइंडर-लघुकथा

रिमाइंडर
" मनीषा, एल आई सी की किश्त भरने का समय निकल गया। अब फाइन देना होगा। रिमाइंडर तो लगा दिया होता।"
मनीषा चाय बनाते बनाते रुक गई। उसने अमित की ओर देखा और एक फीकी हँसी हँस दी।
अमित को सहसा याद आ गया वह पार्टी वाला दिन जब उसने अपने दोस्तों से परिचय करवाते हुए कहा था" ये हैं हमारी श्रीमती जी जो सारे काम रिमाइंडर से ही करती है। साल बदलते ही सभी खास मौकों के लिए रिमाइंडर सेट कर देती हैं। मुझे लगता है आगे रिमाइंडर पर यह भी लगा देंगी की मैं ही इनका पति हूँ।"
और दोस्तों के ठहाको के बीच किसी ने उस अपमान की रेखा को नहीं देखा जो मनीषा के चेहरे पर उभरी थी।
अमित ने आज अचानक महसूस किया और स्वयं मोबाइल लेकर मनीषा के सामने खड़ा हो गया।
-ऋता

4 टिप्‍पणियां:

  1. अक्सर पति पत्नी द्वारा किये गए कामों का दोस्तों के बीच बखान कर मज़ाक उड़ा देते हैं उनकी इस बात से पत्नी का मन कितना आहात होता है ये एहसास तक नहीं रहता ... सार्थक सन्देश देती लघुकथा .

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (25-07-2017) को वहीं विद्वान शंका में, हमेशा मार खाते हैं; चर्चामंच 2677 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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