शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

नचिकेता-लघुकथा

नचिकेता

प्राची ने आज फिर एक लघुकथा पोस्ट की थी| कथा माता-पिता के सम्बंध-विच्छेद पर आधारित थी| उस कथा में उसके सात वर्ष के पात्र ने वह कहा जो साधारणतया बच्चे नहीं कह सकते| कथा की यही बात आलोचना का विषय बन गई|
चूँकि कथा प्रतियोगिता के लिए थी और अच्छी भी थी इसलिए प्राची से कहा गया,'' आप वह बात किसी बड़े से कहलवाइए, तब हम आपकी कथा को विजेता बना देंगे''
''मगर क्यों''
''क्योंकि छोटे बच्चे इतनी बड़ी बात नहीं कह सकते प्राची जी |''
''मगर जो बच्चा विच्छेद का दंश सह रहा हो....''
''मतलब आप अन्त नहीं बदलेंगी'' प्राची की बात पूरी भी न हुई कि जवाब आ गया|
''विजेता बनने के लिए मैं कोई फेर बदल नहीं करूँगी| अनुभव के सामने उम्र मायने नहीं रखती | कभी नचिकेता-यमराज संवाद पढ़ लीजिएगा| ''
जवाब की प्रतीक्षा किए बिना प्राची ने लॉग आउट कर दिया|


-ऋता शेखर 'मधु'

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-08-2017) को "लड़ाई अभिमान की" (चर्चा अंक 2687) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. छोटे बच्चों के जीवन के अनुभव भी कभी कभी जीवन की वास्तविकता का अहसास करा जाते हैं .प्राची की लघुकथा का पात्र भी ऐसा ही बच्चा रहा होगा .
    गंभीर लघुकथा

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