गुरुवार, 30 नवंबर 2017

जिंदगी में हर किसी को है किसी का इन्तिज़ार

इन्तिज़ार

सर्वशक्तिमान को है बंदगी का इन्तिज़ार
जिंदगी में हर किसी को है किसी का इन्तिज़ार

लाद कर किताब पीठ पर थके हैं नौनिहाल
'वो प्रथम आए', विकल है अंजनी का इन्तिज़ार

पढ़ लिए हैं लिख लिए हैं ज्ञान भी वे पा लिए हैं
अब उन्हें है व्यग्रता से नौकरी का इन्तिज़ार

बूँद स्वाति की मिले, समुद्र को लगी ये आस
तलछटी के सीप को है मंजरी का इन्तिज़ार

ब़ाग़वाँ को त्याग कर विदेश को जो चल दिये हैं
निर्दयी वो भूल जाते भारती का इन्तिज़ार

--ऋता शेखर 'मधु'

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-12-2017) को "पढ़े-लिखे मुहताज़" (चर्चा अंक-2805) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. इस सुंदर खूबसूरत इंतजार के लिए बहुत बहुत बधाई.
    यह इंतजार कुछ पाने की चाह ही तो इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. यदि यही न हो तो जीवन में कुछ नहीं बचता. इंतजार सुंदर होता है. शुभकामनाएं

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  3. आदरणीय /आदरणीया आपको अवगत कराते हुए अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि हिंदी ब्लॉग जगत के 'सशक्त रचनाकार' विशेषांक एवं 'पाठकों की पसंद' हेतु 'पांच लिंकों का आनंद' में सोमवार ०४ दिसंबर २०१७ की प्रस्तुति में आप सभी आमंत्रित हैं । अतः आपसे अनुरोध है ब्लॉग पर अवश्य पधारें। .................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

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