बुधवार, 15 अगस्त 2012

पराधीन सपनेहुँ सुख नाहिं

चित्र गूगल से साभार

स्वावलंबन

आओ मित्रों हम सब सीखें
पाठ स्वावलंबन का
इस पाठ को याद करें हम
तजें भाव परावलंबन का
अपना कार्य जो स्वयं करते
दृढ़ प्रतिज्ञ बन जाते हैं
कोई उनको झुका न पाता
सुख ही सुख वे पाते हैं
पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं
इसे जो भूल जाते हैं
हर कार्य के लिए वे
दूजे का मुँह जोहते हैं
कोई उनका कार्य न करे
दुखों से वे भर जाते हैं
भागीरथ को याद रखो
गंगा को जिसने लाया है
वीर शिवाजी के दृढ़ निश्चय ने
इतिहास में स्थान बनाया है
झाँसी की रानी को देखो
अंग्रेजों को मार भगाया है
गाँधी के स्वावलम्बी स्वभाव ने
महात्मा उन्हें बनाया है
एक बार अपनाकर देखें
खुशियों से भर जाएँगे
कोई कुछ न बिगाड़ सकेगा
जीवन में सफल हो पाएंगे|

ऋता शेखर ‘’मधु”

11 टिप्‍पणियां:

  1. एक बार अपनाकर देखें
    खुशियों से भर जाएँगे
    कोई कुछ न बिगाड़ सकेगा
    जीवन में सफल हो पाएंगे,,,,बहुत सुन्दर प्रस्तुति,,,,,
    वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
    अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,
    RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

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  2. बहुत ही बढ़िया
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!


    सादर

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  3. हम स्वाधीन तो हो गए हैं लेकिन स्वावलंबी नहीं हो पाए हैं।
    प्रेरक कविता।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  5. बहुत सुन्दर रचना.....सीधी सच्ची सी बात कहती हुई....
    स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ....
    सस्नेह
    अनु

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  6. कितना सुन्दर लिखा है आपनें...

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  7. सार्थक विचार लिए पंक्तियाँ ..... हार्दिक शुभकामनायें

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  8. स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  9. भागीरथ को याद रखो
    गंगा को जिसने लाया है
    वीर शिवाजी के दृढ़ निश्चय ने
    इतिहास में स्थान बनाया है ..

    सच कहा है ... कठोर संकल्प लेने का समय है आज भी ... देश में बदलाव तभी संभव होगा .. उत्तम भावमय रचना ...

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