सोमवार, 1 अगस्त 2016

गुलामों की भीड़ - लघुकथा

गुलामों की भीड़

जिलाधिकारी महोदय के करीबी मित्र कवि थे और शहर में कविता पाठ करना चाहते थे। इसके तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया और भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी महोदय ने ली, आखिर मित्र जो थे।

एक मेसेज टाइप कर सबको S M S किया गया-
" सभी बी एल ओ को सूचित किया जाता है कि हिंदी भवन में आज शाम 4 बजे मीटिंग है। सबको आना अनिवार्य है। न आने वालों को " कारण बताओ" नोटिस जारी किया जाएगा।"

खचाखच भरे हॉल में कविता पाठ सुन रही गुलामों की भीड़ "कारण बताओ (show cause)" से बच जाने के कारण खुश थी।

-ऋता शेखर 'मधु'

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (03-08-2016) को "हम और आप" (चर्चा अंक-2423) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 'जिंदगी के सफ़र में किशोर कुमार - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. आज टीवी पर देखा कि मेरी छोटी बहन अर्चना चावजी के गाँव खरगोन, मध्य प्रदेश में प्याज को सड़ने से बचाने के लिये प्रशासन की ओर से आदेश दिया गया है कि सभी अधिकारी ५० -५० किलो प्याज खरीदें!
    अंधेरनगरी का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया आपने!!

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