1.बीज का अँकुर
पन्द्रह दिन पहले सोनाली की शादी हुई थी| सोनाली के मम्मी-पापा बेटी से मिलने ससुराल आए थे| सोनाली के सास, ससुर, ननद, देवर सबने दिल खोलकर स्वागत किया|
थोड़ी देर बाद ससुर जी ने कहा,”बहु, अपने मम्मी-पापा को अपने कमरे में ले जाओ|”‘जी पापा जी,’कहकर सोनाली माता पिता को अपने कमरे में ले गई|
‘बेटा, यहाँ सब ठीक तो है न|तुम्हारा मान सम्मान कैसा है| दामाद जी का व्यवहार कैसा है,’पिता की चिन्ता वाजिब थी|
‘जी पापा, सब ठीक है| बस मुझे एक ही बात अच्छी नहीं लगती कि सवेरे सवेरे उठकर ननद, देवर के लिए नाश्ता बनाना पड़ता है| ससुर जी के लिए चाय, सासु माँ के लिए पूजा की तयारी, साथ ही आपकेदामाद जी की फरमाइशें| दो घंटे चकरघिन्नी की तरह नाचने के बाद ही मैं अपना काम कर पातीहूँ|’‘और दिन भर’, पापा ने सवाल किया|
‘फिर दिन भर आराम है| टीवी देखती हूँ| इनके साथ घूमने जाने पर कोई रोक टोक नहीं|’
‘कोई तुमसे सख्त आवाज में बात भी करता है क्या,’
‘नहीं तो,’ सोनाली ने सच बताया|
‘ फिर बेटा, ये शिकायत कैसी! क्या वहाँ तुम मेरा और अपनी माँ का ख्याल नहीं रखती थी? छोटे भाई बहन को खाना भी देती थी| वहाँ तो तुम्हें कोई शिकायत न थी|’
‘जी’ सोनाली ने सर झुकाकर कहा|
तभी सोनाली को उसकी सासू माँ नेआवाज दी| सोनाली चली गई तो उसकी माँ ने कहा, ‘बेचारी बच्ची ने अपने दिल की बातबताई और आपने उसे ही समझा दिया|’
‘नहीं सोनाली की माँ, उसे यहाँ कोई तकलीफ नहीं| जिम्मेदारियाँ निभाना हर बहु को आना चाहिए| यदि आज हम उसकी शिकायत सुन लेंगे, मतलब इस घर में विष का बीज बो देंगे| उसके विषैले अँकुर में पनपी परिस्थितियाँ सबके लिए भयावह हो जाएँगी|’
दरवाजे पर खड़ी सोनाली ने मुस्कुराकर कहा,’ मेरे पापा दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं|’
--ऋता शेखर ‘मधु’