सरस्वती वंदना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा ।
सबके हृदय में प्रवेश करना
आखर की माला तुमने सजाई
पन्नों पर उसको लेकर उतरना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा
मिले ज्ञान-मोती सबको ही जग में
कदमों के नीचे हों फूल मग में
बुद्धि सरल और निश्छल हो वाणी
गुरुओं का आदर करें बन के ध्यानी
अन्तस् में ज्योति खुशियों की धरना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा।
शब्दों में गरिमा की है जरूरत
यही इस जगत को संज्ञान देना
व्यवहार प्रेमिल हो सारे जगत से
मुख पर सभी के मुस्कान देना
वीणा से अपनी मधुर गान गढ़ना
विद्या की देवी हे श्वेतवर्णा।
ऋता शेखर
