शनिवार, 29 सितंबर 2012

बागवान परेशान


दिगम्बर नासवा जी के ब्लॉग पर ग़ज़ल का सबसे छोटा रूप देखा...वैसा उत्कृष्ट तो नहीं लिख सकती पर कोशिश करने में हर्ज़ क्या है...त्रुटियों के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ|

बागवान
परेशान

बँगला है
आलीशान

भरा हुआ
सामान

बेटी वाले
भाग्यवान

पुत्र निकला
पाषाण

हृदय का
वियाबान

खाली दिमाग
शैतान

मन में नहीं
सम्मान

शरीर चाहे
विश्राम

जान है तो
जहान

वृद्ध का कमरा
सुनसान

उसे जाना है
श्मशान

ऊपर में
भगवान

धरती पर
इंसान

गाएँ अपनी
दास्तान

ऋता शेखर मधु

28 टिप्‍पणियां:

  1. वाह इस अंदाज पर
    हम हुए कुर्बान

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  2. वाह,,,ऋता जी,
    निराले अंदाज प्रस्तुति का जबाब नही,,लाजबाब,,,

    RECENT POST : गीत,

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  3. लेखनी में
    अटकी है जान

    सो लिखते रहो
    मेहरबान कदरदान..
    :-)
    बढ़िया है ऋता जी...
    सस्नेह
    अनु

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  4. दिगंबर साहब की गजलों का क्या कहना |
    सिद्धहस्त हैं दिगंबर जी-

    आपने भी मस्त रचा है-
    बधाई आपको -
    बढ़िया ||

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  5. वाह कितनी सुन्दर ग़ज़ल है आनंद आ गया
    वृद्ध का कमरा
    सुनसान

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  6. कल 01/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. यह गज़ल भी नासवा जी की गज़ल से कम नहीं. बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    बधाई.

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (01-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  9. रचना है
    महान

    हो रहा
    गुंजायमान

    ले लो बधाइयाँ
    और सम्मान

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    उत्तर
    1. शुक्रिया यशोदा जीः)
      उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का आभार...
      शुभकामनाएँ आप सबको!!

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  10. मधुर मधुर गुंजन गुंजायमान हो
    रहा है आपकी इस प्रस्तुति में

    आभार ऋता जी.

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  11. भाव, भाषा एवं अभिव्यक्ति सराहनीय है। मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  12. अच्छी रचना
    बहुत सुंदर



    जब भी समय मिले, मेरे नए ब्लाग पर जरूर आएं..
    http://tvstationlive.blogspot.in/2012/09/blog-post.html?spref=fb

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  13. दिगम्बर जी की तो ग़ज़लें शानदार होती हैं...और वो छोटी गजलों का जो उन्होंने एक्सपेरिमेंट किया है वो तो शानदार है...
    दीदी, लेकिन आपकी भी ये छोटी ग़ज़ल बेहद अच्छी बनी हुई है.....

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  14. kahna uchit to n hoga lekin mano nasva ji ki gazal ko takkar deti hui si.

    prabhav chhodti gazal.

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  15. मैं भी हौरान
    परेशान हूँ
    कैसे सागर
    एक गागर में...

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  16. सुंदर दास्तान ...!!
    शुभकामनायें ऋता जी ...!!

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