अंबष्ठ कायस्थ का इतिहास
जय श्री चित्रगुप्त जी महाराज 🙏
प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त जी से हुई है। अंबष्ठ कायस्थों की एक उप-जाति है, जो मुख्य रूप से भारत के हिंदी भाषी क्षेत्रों में पाई जाती है।
अंबष्ठ कायस्थ देश के विभिन्न हिस्सों में पाए गए थे, और वे स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिल गए। भारत में अंबष्ठ समुदाय विभिन्न राज्यों में बिखरा हुआ है, और उनकी सबसे आसान पहचान उनके अंतिम नाम (उपनाम) से होती है। समय के साथ कई नए नाम विकसित हुए हैं।
अंबष्ठ द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुछ सामान्य उपनाम हैं - अंबष्ट, अंबष्ठ, अंबष्था, अंबुस्त, प्रसाद, सहाय, सिन्हा, वर्मा।
अंबष्ठ कायस्थ मुख्य रूप से बहिर्विवाह (अपने गोत्र से बाहर शादी) के लिए "खास घर" की प्रणाली का पालन करते हैं।* 'घर' का उपयोग उपनाम के रूप में भी किया जाता है। ये "खास घर" अनिवार्य रूप से उन गांवों के पहचानकर्ता हैं जहाँ अंबष्ठ मौर्य काल में तक्षशिला से विस्थापित होने के बाद मगध क्षेत्र में बस गए थे। इनमें से कुछ 'घर' हैं - बड़ियार, बरियार, बर्तियार, भरथुआर, बिलवर, बिरनावे, चरगावे, दराद, डेरहगावे, ढुढुआनी, दुमरवे, एठघर, गहिलवार, गयावर, हरघवे, जमुआर, करपटने, कोचगावे, माहथा जयपुरियार, मेजोरवार रुखाइयार, मालदहियार, मंडिलवार, नंदकुलियार, निमाइयार, पंचबारे, पनपटने,कतरियार, परवतियार, राजगृहार, सकलदिहार, सांडवर और कई अन्य।
प्राचीन काल में अंबस्ट नाम का एक राज्य था जो चंद्रभागा (वर्तमान चिनाब नदी) और ऐरावत (वर्तमान रावी नदी) के बीच स्थित था। अंबस्ट राज्य की चर्चा ब्रह्म पुराण में भी मिलती है। इस राज्य के निवासियों को अंबस्टा कहा जाता था। पाणिनी ने भी कश्मीर के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र के निवासियों को अंबस्टा कहा है। श्री चित्रगुप्त के पुत्र हिमवान ने वहाँ मंत्री का पद संभाला था और उनकी पीढ़ियाँ भी वहीं बस गईं। वहाँ के लोग बहुत बहादुर थे और महाभारत में कौरवों के साथ लड़े थे।
*अम्बष्ठ कायस्थ का विस्तार*
भारतीय इतिहास और ग्रंथों में अम्बष्ठ (या अम्बष्ट/अम्बष्ठ कायस्थ) शब्द का प्रयोग एक प्राचीन समुदाय, राजवंश और भौगोलिक क्षेत्र के लिए किया जाता रहा है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अम्बष्ठों को भगवान चित्रगुप्त के पुत्र हिमवान (सारंगधर) का वंशज माना जाता है। चिकित्सा (आयुर्वेद), सैन्य और प्रशासनिक क्षेत्रों में इनका विशेष योगदान रहा है।
पौराणिक काल से लेकर आधुनिक इतिहास तक, अम्बष्ठ समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सूची नीचे दी गई है:
*पौराणिक एवं प्राचीन कालीन महत्वपूर्ण व्यक्ति*
*भगवान धन्वन्तरि:* हिंदू मान्यताओं के अनुसार इन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है। धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों (जैसे 'कायस्थ: एन एन्साइक्लोपीडिया ऑफ अनटोल्ड स्टोरीज') में इन्हें अम्बष्ठ परंपरा और चिकित्सा ज्ञान से जोड़कर देखा जाता है।
*राजा अम्बष्ठ (महाभारत कालीन)*: महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ने वाले एक महान योद्धा और राजा थे। इन्होंने युद्धभूमि में अर्जुन और अन्य योद्धाओं का वीरता से सामना किया था।
*राजा आम्बष्ठ्य*: ऐतरेय ब्राह्मण और प्राचीन ग्रंथों में वर्णित एक प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट, जिन्होंने प्राचीन काल में अश्वमेध यज्ञ संपन्न कराया था।
*राजा आदि शूर (बंगाल)*: इतिहास में बंगाल के सेन और अन्य कायस्थ राजवंशों को अम्बष्ठ परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। राजा आदि शूर ने ही कन्नौज से विद्वान ब्राह्मणों और कायस्थों को बंगाल में लाकर बसाया था।
*आधुनिक एवं समकालीन प्रसिद्ध व्यक्ति (अम्बष्ठ कायस्थ समाज*
वर्तमान समय में अम्बष्ठ मुख्य रूप से उत्तर भारत (विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश) के चित्रगुप्तवंशी कायस्थ समुदाय की एक प्रमुख उपजाति है। इस समाज से आने वाली कुछ प्रमुख हस्तियां निम्नलिखित हैं:
*महामाया प्रसाद सिन्हा*: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, जो राजनीति में अपने जन-सरोकारों के लिए जाने जाते थे।
*कृष्ण बल्लभ सहाय (के. बी. सहाय):* बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने बिहार में जमींदारी उन्मूलन में बड़ी भूमिका निभाई थी।
*शेखर सुमन* - कायस्थ (अंबस्थ)
जन्म: 14 जून 1960, पटना, बिहार
पेशा: अभिनेता, होस्ट और गायक
*उदय सहाय*: प्रसिद्ध लेखक और पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी, जिन्होंने कायस्थ समाज के इतिहास पर गहन शोध परक पुस्तकें लिखी हैं।
अम्बष्ठ समाज के लोग पारंपरिक रूप से अपनी बुद्धिमत्ता, प्रशासनिक नेतृत्व, लेखन और कला के क्षेत्रों में अग्रणी माने जाते हैं。
साभार
गूगल, कायस्थ इनसाइक्लोपीडिया


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणियाँ उत्साहवर्धन करती है...कृपया इससे वंचित न करें...आभार !!!