गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

कवि बनोगे कैसे!.




कवि बनोगे कैसे!.

प्यार होगा नहीं
रस बरसेंगे कैसे!
पैर फिसलेंगे नहीं
सँभलना सीखोगे कैसे!
दिल दुखेगा नहीं
सावन टपकेंगे कैसे!
खुशियाँ मिलेंगी नहीं
बसंत हसेंगे कैसे!
माँ बनोगी नहीं
धरा कहलाओगी कैसे!
पिता बनोगे नहीं
आकाश समझोगे कैसे!
जुदाई होगी नहीं
दिल तड़पेंगे कैसे!
मिलन होगा नहीं
एहसास जगेंगे कैसे!
ताने मिलेंगे नहीं
आह निकलेगी कैसे|
सौन्दर्य दिखेगा नहीं
वाह बोलोगे कैसे!
अभाव मिलेंगे नहीं
चाह आएगी कैसे!
मदद मिलेगी नहीं
एहसान जतेंगे कैसे!
मदद करोगे नहीं
कृतज्ञता पाओगे कैसे!
भव-सागर में तैरोगे नहीं
किनारा मिलेगा कैसे!
सपने देखोगे नहीं
शिखर पाओगे कैसे!

ये बातें हों नहीं
भावना जगेगी कैसे!
भावना जगे नहीं
लेखनी चलेगी कैसे!
बोलो, कवि बनोगे कैसे!!!

ऋता शेखर मधु

12 टिप्‍पणियां:

  1. शास्वत सत्य...बहुत प्रेरक और सुंदर प्रस्तुति..

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  2. मन में भाव आने पर ही कविता जन्म होता है
    बहुत बढ़िया,बेहतरीन अच्छी रचना ,.....

    MY NEW POST...आज के नेता...

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  3. हूँ...भाव ही शब्दों को जन्म देते हैं.....

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  4. वाह गज़ब के भाव संजोये हैं।

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  5. ये बातें हों नहीं
    भावना जगेगी कैसे!
    भावना जगे नहीं
    लेखनी चलेगी कैसे!
    बोलो, कवि बनोगे कैसे!!!

    .सशक्त रचना .

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  6. कविता का भाव बहुत ही अच्छा लगा । मेरे पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  7. बहुत सही सवाल किया हैं उत्तर भी निहित हैं

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  8. yadi aap mere dwara sampadit kavy sangrah mein shamil hona chahti hain to sampark karen
    rasprabha@gmail.com

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  9. वाह, ये तो बड़ी सुंदर कविता है।

    बहुत अच्छा लगा पढ़ कर।

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  10. माने या न माने पर
    ऋता जी, आप तो कवि बन चुकी हैं.

    आपकी भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति से
    मन्त्र मुग्ध हूँ.

    शानदार प्रस्तुति के लिए आभार,जी.

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