शनिवार, 21 दिसंबर 2019

दोहों के प्रकार 1- भ्रमर दोहा

दोहों के प्रकार पर आज की कार्यशाला 1-
भ्रमर दोहा
दोहों के तेईस प्रकार होते है।
वैसे 13-11के शिल्प से दोहों की रचना हो जाती है जिनमें प्रथम और तृतीय चरण का अंत लघु गुरु से तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण का अंत गुरु लघु से होता है।कुल 48 मात्राएँ होती हैं।
किंतु आंतरिक शिल्प की बात करें तो दोहे 23 प्रकार के होते हैं । हर शिल्प के लिए दोहों के अलग-अलग नाम हैं। ये सज्जा एवं नाम गुरु वर्णों के अवरोह क्रम में सजाए गए हैं।मेरी कोशिश है कि हर प्रकार के कुछ दोहे लिख सकूँ तथा मित्रों को भी बता सकूँ। इसी कोशिश में प्रथम प्रकार आप सभी के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है। यहाँ 22 गुरु वर्ण तथा 4 लघु वर्णों का प्रयोग किया गया है।
1
भ्रमर दोहा-
22 गुरु 4लघु=48
2222212,222221
2222212,222221
खाना पानी श्वास में, है प्राणी का सार।
पौधों पेड़ों ने रचे, जीने का आधार।।

माया काया के बिना, सूना है संसार।
वाणी योगी साधना, ले जाएँगे पार।।

झूमे गाये जिंदगी, हो फूलों का साथ।
माथे माथे हों सजे, कान्हा जी के हाथ।।

आती जाती जिंदगी, खोते पाते लोग।
हीरे को हीरा मिले, हो ऐसा संजोग।।

चंदा से है चाँदनी, पेड़ों से हैं पात।
फूलों से खुश्बू मिली, खानों में सौगात।।
--ऋता शेखर 'मधु'
सौजन्य- साहित्यम ब्लॉग से साभार

3 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(२२-१२ -२०१९ ) को "मेहमान कुछ दिन का ये साल है"(चर्चा अंक-३५५७) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    **
    अनीता सैनी

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