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रविवार, 23 अगस्त 2020

बाढ़


Weather Update: 30 killed due to lightning in Bihar heavy rain ...
बाढ़ से भयावह स्थिति: प्रभावित ...
एक सुनहरी रेखा खींच
चपल दामिनी नभ के बीच
नभ-वसुधा से रिश्ता जोड़
सघन कालिमा देती तोड़|
ले आती बारिश की धार
जिसमें हुलसे घर संसार।
समझ न पाती वह यह बात
बाढ़ बुलाती अति बरसात।


नदियाँ रूप धरें विकराल
हहराती सी उनकी चाल।
सुरसा सम होतीं बेताब
लहरें लिखतीं नई क़िताब।
जाने क्या क्या लेतीं लील
बुझते खुशियों के कंदील।

कृषक स्वप्न को देकर मात
बाढ़ बुलाती अति बरसात।
तीव्र वेग से देकर जोर
आकर नीर मचाते शोर।
तटबन्धें होतीं लाचार
खिसक गिरें उनकी दीवार।

सर सर बढ़ते जाते पाँव
पानी में डूबे हैं गाँव।
सर्प निकल करते आघात
बाढ़ बुलाती अति बरसात।
बह जाते हैं फसल मकान
मिट जाते कितने अरमान।

ले नेता को उड़े विमान
जनता देख हुई हैरान।
राहत के थोड़े सामान
चैनल पर करते गुणगान।
बेघर होकर मिले न भात
बाढ़ बुलाती अति बरसात।

@ऋता शेखर 'मधु'

गुरुवार, 4 जुलाई 2019

ग्रीष्म

ग्रीष्म ऋतु
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ग्रीष्म की दुपहरिया
कोयल की कूक से
टूट गयी काँच सी

छत पर के पँखे
सर्र सर्र नाच रहे
हाथों में प्रेमचंद
नैंनों से बाँच रहे

निर्मला की हिचकियाँ
दिल में हैं खाँच सी

कोलतार पर खड़े
झुंड हैं मजूरों के
द्वार पर नाच रहे
बानर जमूरों के

लू की बड़ी तपन
खस में है आँच सी

चंदन की खुश्बू सा
खत भी है पास में
आएगा जवाब एक
प्रेम भी है आस में

विचारों की आँधियाँ
परख रहीं जाँच सी

गपशप की इमरती
ठहाकों में छन रही
आम की फाँकों पर
मेथी मगन रही

जीभ की ग्रंथियाँ
चटपटी कुलाँच सी

-ऋता शेखर ‘मधु’