शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

हाइकु में उतरी वर्षा रानी




१.
मेघ गरजा
टिप टिप बरसा
मन हरषा|
.      
पानी बरसा
सोंधी खुशबू उड़ी
धरती धुली|
३..
वन का मोर
घटाएँ घनघोर
भावविभोर|.
४.
घटा है आती
बिजली चमकाती
शोर मचाती|
५.
सह न सका
वाष्पकणों का बोझ
बरसा मेघ
६.
बहती धारा
सजाई बालकों ने
कागज़ी नाव|
७.
प्रथम बूँद
आम की डाल पर
क्यों भूले पेंगे|

८.
मेघों की कूची
आकाश केनवास
उकेरे चित्र|
९.
ऋतु सावन
शंकर सा पावन
हुलसा मन|
१०.
हरी चूड़ियाँ
खनकी कलाईयाँ
सावन आया|
११.
अम्बर धरा
बंधे एक सूत्र में
बरसात में|
१२.
छतरी तनी
नभ धरा के बीच
नया आकाश|
१३..
बारिश आती
महावर रचाती
गोरी शर्माती|
१४.
भरे पोखर
मेढक टर टर
गूंजा शहर|
१५.
बारिश रुकी
पत्तों ने टपकाए
बूँद के मोती|

१६.
दूर क्षितिज़
सतरंगी चुनर
इन्द्रधनुष|

ऋता शेखर 'मधु'

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर हाइकु में वर्षा .... अलग अलग रूप दिखे ---

    मेघ बरसा
    शहर में कीचड़
    जाम में फंसे ।
    :):)

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  2. बूंदों का परिधान
    छम छम बजती पायल
    कितनी सुन्दर वर्षा ...

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    1. आपके शब्दों ने एक सुंदर हाइकु दे दियाः)

      सुन्दर वर्षा
      बूँदों का परिधान
      बजी पायल|

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  3. बहुत सुन्दर हायेकु ऋता जी.....
    बूंदों से बिखरे हैं.....

    सस्नेह
    अनु

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  4. बहुत ही बेहतरीन हाइकु है..
    बहुत सुन्दर :-)

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  5. वाह: ऋता ! तुम्हारे हाइकु ने तो भीगो दिया.
    हाइकू बरसा
    मन तरसा
    भीगे बिन बरसा ....

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    1. अपनी टिप्पणी हाइकु के रूप में देखें...

      मन तरसा
      हाइकु जो बरसा
      भिगो के गयाः)

      हटाएं
  6. वन का मोर
    घटाएँ घनघोर
    भावविभोर|

    बहुत सुन्दर हाइकु....

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (21-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. बर्षा का सुन्दर सार्थक चित्रण ..
    हमारी तो अभी तक न छतरी निकल पायी है न बरसाती ..
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  9. हरी चूड़ियाँ
    खनकी कलाईयाँ
    सावन आया|

    अम्बर धरा
    बंधे एक सूत्र में
    बरसात में|
    बहुत ही भावमय ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. छतरी तनी
    नभ धरा के बीच
    नया आकाश|

    बहुत खूब ...
    ढेरों रूप दिखे
    हाइकु में वर्षा रानी के
    सादर !!

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  11. बहुत सुंदर !!
    मन हर्षा
    हाईकू की
    देख कर वर्षा!!

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  12. हायकू में वर्षा का रूप अनोखा है. बहुत खूबसूरत.

    बधाई.

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  13. क्या खूब कहा आपने वहा वहा बहुत सुंदर !! क्या शब्द दिए है आपकी उम्दा प्रस्तुती
    मेरी नई रचना
    प्रेमविरह
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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